लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा पर आधारित लेख का हवाला देते हुए चीन और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा मामलों पर चर्चा की मांग की. पिछले दो दिनों से यह मुद्दा संसद में लगातार गरमाया हुआ है. मंगलवार को जब राहुल गांधी ने फिर से चीन के साथ सैन्य टकराव का विषय उठाने की कोशिश की तो लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हो गया.
इस पूरे विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एस.पी. वैद का बयान सामने आया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जनरल नरवणे को नसीहत देते हुए कहा कि एक पूर्व सेना प्रमुख को ज्यादा समझदारी दिखानी चाहिए थी. उन्होंने लिखा कि सेना में रहते हुए जो संवेदनशील बातें पता चलती हैं, वे अक्सर कब्र के साथ ही दफन हो जानी चाहिए. अगर हर कोई ऐसी बातों को सार्वजनिक करने लगे तो सरकारें मुश्किल में पड़ सकती हैं.
Former Army Chief, General M. M. Naravane, should have known better. Much of what men in uniform carry is meant to go with us to the grave. If everyone began talking, governments would tremble.
— Shesh Paul Vaid (@spvaid) February 2, 2026
राहुल गांधी ने उठाई मांग
राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि जनरल नरवणे की किताब पर आधारित लेख को सत्यापित किया जाना चाहिए. उन्होंने इसे सदन के पटल पर रखते हुए कहा कि यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसमें चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों का संदर्भ है. उनका कहना था कि यह मुद्दा राष्ट्रपति के अभिभाषण से भी जुड़ा हुआ है. सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि जब आसन की ओर से पहले ही व्यवस्था दी जा चुकी है तो उस विषय को दोबारा उठाना सही नहीं है. इस पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं.
मल्लिकार्जुन खरगे ने साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि आखिर जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या है, जिससे मोदी सरकार के बड़े नेता घबरा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा से बच रही है. खरगे ने कहा कि गलवान घाटी में 2020 में शहीद हुए 20 जवानों के बाद भी सरकार ने चीन को क्लीन चिट दी, जो देश के लिए चिंताजनक है.


