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फादर ऑफ ऑल डील्स में भारत की जीत! 40 अरब डॉलर के सामान पर अमेरिका में टैक्स जीरो
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फादर ऑफ ऑल डील्स में भारत की जीत! 40 अरब डॉलर के सामान पर अमेरिका में टैक्स जीरो

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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच जो नया ट्रेड समझौता हुआ है, उसमें भारत के डेयरी और खेती से जुड़े सामानों को बाहर रखा गया है. लेकिन अच्छी खबर ये है कि भारत के करीब 40 अरब डॉलर से ज़्यादा के सामान अब अमेरिका में बिना किसी टैक्स (जीरो ड्यूटी) के जा सकेंगे. 

 कपड़ा, चमड़े के सामान, समुद्री उत्पाद, केमिकल और कुछ खेती व प्रोसेस्ड फूड जैसे सामानों पर लगने वाला टैक्स पहले ही दिन से कम कर दिया जाएगा. जो टैक्स पहले 25% या उससे ज़्यादा था, अब उसे घटाकर 18% कर दिया जाएगा.

25% पेनल्टी टैरिफ जल्द हटेगा

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित इस डील की बुनियादी रूपरेखा पर बात करते हुए सूत्रों ने बताया कि रूस से तेल खरीदने के कारण भारतीय सामानों पर लगाया गया 25% का पेनल्टी टैरिफ कुछ ही दिनों में हटा दिया जाएगा. इसके अलावा करीब 30 अरब डॉलर के श्रम-आधारित भारतीय सामान पर लगाया गया 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ भी संयुक्त बयान के जरिए डील फाइनल होने के कुछ दिन बाद घटकर 18% हो जाएगा. ये आंकड़े 2024 के द्विपक्षीय व्यापार डेटा के आधार पर बताए गए हैं. सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी.

अब भारतीय एक्सपोर्टर्स को 1-2% की बढ़त

एक सूत्र ने बताया कि अमेरिकी बाजार में भारतीय एक्सपोर्टर्स को बांग्लादेश, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, चीन, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से कड़ी टक्कर मिल रही थी, क्योंकि उन देशों के श्रम-आधारित उत्पादों पर ड्यूटी काफी कम थी. वहां करीब 19-20% ड्यूटी लगती थी, जबकि भारतीय सामान पर करीब 50% तक टैक्स पड़ रहा था. अब इस डील के बाद भारतीय एक्सपोर्टर्स को करीब 1 से 2 फीसदी की ड्यूटी बढ़त मिलेगी. फिलहाल अमेरिका में वियतनाम पर 20%, मलेशिया पर 19%, बांग्लादेश पर 20%, कंबोडिया पर 19% और थाईलैंड पर 19% ड्यूटी लगती है, जो भारत से ज्यादा है.

पीयूष गोयल बोले- संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में कहा कि इस डील में संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और इससे श्रम-आधारित और निर्यात से जुड़े सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा. उन्होंने कहा, “यह सच में ऐसी डील है जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए.”

अमेरिका बोला- भारत इंडस्ट्रियल गुड्स पर टैरिफ शून्य करेगा

अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीयर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ घटाने पर सहमति जताई है और भारत के इंडस्ट्रियल गुड्स पर टैरिफ 13.5% से घटकर शून्य हो जाएगा. उन्होंने CNBC से कहा, “भारत खेती से जुड़े कुछ सामानों पर अभी भी थोड़ी सुरक्षा बनाए रखेगा.”

किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत के श्रम-आधारित सेक्टर पर पड़ा था, जहां ड्यूटी 50% तक पहुंच गई थी. इनमें टेक्सटाइल और रेडीमेड कपड़े, लेदर और फुटवियर, मरीन प्रोडक्ट, केमिकल्स, प्लास्टिक, रबर, होम डेकोर, कारपेट, मशीनरी, कुछ कृषि सामान और प्रोसेस्ड एग्री प्रोडक्ट शामिल थे.

जॉइंट स्टेटमेंट से डील होगी फाइनल

सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की सरकारें एक जॉइंट स्टेटमेंट को अंतिम रूप दे रही हैं, जिससे इस डील की पूरी रूपरेखा तय होगी. इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर डील पर मुहर लगेगी. एक दूसरे सूत्र ने कहा, ‘डील की ज्यादातर शर्तें जॉइंट स्टेटमेंट के बाद लागू होंगी. कुछ बातों के लिए अलग-अलग समयसीमा हो सकती है. लेकिन डील पहले से ही एक तय ढांचे में तय हो चुकी है इसलिए इसे जल्दी लागू किया जाएगा.’

गोयल बोले- हर भारतीय के हित सुरक्षित

पीयूष गोयल ने कहा, “जल्द ही दोनों देश एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करेंगे और जैसे ही डील पर आखिरी मुहर लगेगी और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होगी, सारी जानकारी साझा की जाएगी. मैं 140 करोड़ देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि यह डील हर भारतीय के हितों की रक्षा करेगी, हमारे कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित रहेंगे और टेक्सटाइल, प्लास्टिक, कपड़े, होम डेकोर, लेदर-फुटवियर, जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल, रबर गुड्स, मशीनरी और एयरक्राफ्ट पार्ट्स जैसे सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा.”

अमेरिका भी डील को अंतिम रूप देने में जुटा

ग्रीयर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इस ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने में लगा है. उन्होंने कहा, “हमें सारी डिटेल्स पता हैं, अब बस कागजी काम पूरा करना है.”

अमेरिका ज्यादा खेती के सामान भारत को बेचेगा

इससे पहले अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस ने कहा था कि इस डील के तहत अमेरिका भारत को ज्यादा खेती से जुड़े प्रोडक्ट बेचेगा, जिससे अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में ज्यादा पैसा पहुंचेगा. उन्होंने X पर लिखा कि 2024 में अमेरिका का भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था और भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी खेती के सामान के लिए बड़ा बाजार है. यह डील उस घाटे को कम करने में मदद करेगी.

500 अरब डॉलर की खरीद पांच साल में

सूत्रों के मुताबिक, 500 अरब डॉलर की खरीद की प्रतिबद्धता पांच साल में पूरी होगी और इसमें वही चीजें होंगी जिनकी भारत को सच में जरूरत है. जैसे, भारत को तेज आर्थिक विकास के लिए 100 अरब डॉलर से ज्यादा के हवाई जहाज और उनके पार्ट्स चाहिए. इसके अलावा हर साल अरबों डॉलर का कच्चा तेल और गैस (एलएनजी) भी खरीदी जाएगी. नवंबर 2025 में ही अमेरिका से भारत का कच्चे तेल का आयात 47.6% बढ़कर 1.9 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया था, जबकि मात्रा के हिसाब से यह 31.4% बढ़कर 53.85 लाख टन पहुंच गया था.

इस 500 अरब डॉलर के पैकेज में हीरे जैसे कीमती पत्थर (सोने को छोड़कर, जिस पर कुछ कोटा सिस्टम होगा), हाई-टेक प्रोडक्ट, डेटा सेंटर और जीसीसी के लिए उपकरण, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग भी शामिल होगा. एक सूत्र ने कहा कि ये सभी सेक्टर भारत के विकास और विकसित देश बनने के लक्ष्य के लिए बेहद जरूरी हैं और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा.

10 अरब डॉलर के सामान को मिल सकती है जीरो ड्यूटी

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ‘डील के बाद भारत के करीब 10 अरब डॉलर के सामान को अमेरिका में जीरो ड्यूटी पर एक्सपोर्ट की इजाजत मिल सकती है, जैसा अमेरिका अपने कई एफटीए पार्टनर्स को देता है. यह अमेरिका की PTAAP सूची के तहत होगा, जिसमें करीब 2,000 प्रोडक्ट शामिल हैं, जैसे प्राकृतिक संसाधन, कॉफी, चाय, फल, टमाटर और फलों के जूस. इसके अलावा करीब 4 अरब डॉलर के भारतीय सामान पहले से ही छूट में हैं, जैसे कुछ कृषि उत्पाद, कागज और खनिज.  फार्मा और मोबाइल फोन पहले से ही छूट में थे और डील के बाद भी वे टैक्स फ्री ही रहेंगे.’

स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पर सेफगार्ड ड्यूटी जारी

करीब 12-13 अरब डॉलर के कुछ सामान जैसे स्टील, एल्युमिनियम, ऑटो, ऑटो पार्ट्स और कॉपर पर अमेरिका की सेफगार्ड ड्यूटी लगी हुई है. ये ड्यूटी सभी देशों पर लागू होती है और यह मामला विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दायरे में आता है. अमेरिका के जो सामान भारत के लिए ज्यादा संवेदनशील हैं, उन पर भारत में ड्यूटी सुरक्षा बनी रह सकती है, जबकि कम संवेदनशील सामानों को तुरंत जीरो ड्यूटी की सुविधा मिलेगी.

संवेदनशील सामानों में डेयरी, अनाज, मक्का, मांस, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, जीएम फूड, सोयाबीन और एथनॉल शामिल हैं. थोड़े कम संवेदनशील सामान जैसे बादाम, पिस्ता, चेरी और हेज़लनट पर कोटा सिस्टम हो सकता है, जबकि लेट्यूस और कुछ तेलों पर 3 से 10 साल में धीरे-धीरे ड्यूटी खत्म करने की व्यवस्था होगी.

 



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