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करूर भगदड़: पुलिस बोली- ’50 लोगों पर एक सिपाही था तैनात’, हाई कोर्ट का मामले की तत्काल सुनवाई स
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करूर भगदड़: पुलिस बोली- ’50 लोगों पर एक सिपाही था तैनात’, हाई कोर्ट का मामले की तत्काल सुनवाई स

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तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कझगम (TVK) की रैली के दौरान मची भगदड़ में 40 लोगों की मौत और करीब 100 के घायल होने के बाद पुलिस पर सुरक्षा चूक के आरोप लग रहे हैं, लेकिन राज्य पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त संख्या में जवान तैनात थे. पुलिस का कहना है कि आयोजन में अनुमान से कहीं ज्यादा भीड़ उमड़ने से हालात बिगड़ गए.

500 जवानों की तैनाती, भीड़ का गलत अनुमान
एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) डेविडसन देवसिरवथम ने बताया कि करूर कार्यक्रम को उच्च जोखिम श्रेणी में रखा गया था. इसीलिए 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. उन्होंने कहा, ‘आयोजकों ने 12,000 लोगों की अनुमति ली थी, लेकिन हमने 25,000 लोगों के अनुमान से व्यवस्था की, लेकिन यहां करीब 27,000 लोग पहुंच गए.’

पुलिस अधिकारी ने बताया कि विजय की पिछली सभाओं में भी पर्याप्त बल लगाया गया था. त्रिची में 650, अरियालुर में 287, पेरंबलूर में 480, नागपट्टिनम में 410, तिरुवारुर में 413 और नमक्कल में 279 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. वहीं, करूर में एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पाडी पलानीस्वामी की रैली के दौरान सिर्फ 137 पुलिसकर्मी तैनात थे क्योंकि वहां भीड़ अनुशासित थी.

घायलों को निकालना हुआ मुश्किल
देवसिरवथम ने माना कि विजय की रैली के दौरान स्थिति बेहद अराजक हो गई थी. उन्होंने कहा, ‘हम घायल लोगों को भीड़ से बाहर निकाल ही नहीं पाए. यहां तक कि विजय को भी सुरक्षित निकालना मुश्किल हो गया था.’

एडीजीपी ने पलानीस्वामी की एंबुलेंस को लेकर शंका का जवाब देते हुए कहा कि टीवीके ने शर्तों के अनुसार दो एंबुलेंस की व्यवस्था की थी. हादसे के बाद पुलिस ने स्थानीय थाने को सतर्क किया और निजी अस्पतालों से करीब 10 एंबुलेंस मौके पर भेजी गईं.

कैसे शुरू हुआ हंगामा?
अधिकारी के मुताबिक, विजय का नमक्कल कार्यक्रम दोपहर 12 बजे होना था, लेकिन वह चार घंटे देरी से शुरू हुआ. विजय शाम 6 बजे करूर पहुंचे और अपने प्रचार वाहन में सवार हो गए. इस दौरान लोग उन्हें देखने के लिए वाहन के पीछे-पीछे चलते रहे. आयोजकों ने पुलिस की इस सलाह को ठुकरा दिया कि विजय 50 मीटर पहले रुककर भाषण दें. करीब 10 मिनट तक भीड़ उन्हें देख नहीं पाई, जिससे बेचैनी बढ़ी और अचानक भगदड़ मच गई.

पुलिस ने बताया कि कई समर्थक सुबह 11 बजे से ही स्थल पर मौजूद थे. घंटों तक बिना भोजन और पानी के इंतजार करने के कारण उनकी बेचैनी और बढ़ गई थी. अधिकारी ने कहा कि भीड़ के किनारे किसी घटना से हालात और खराब हुए, जिसकी जांच की जा रही है.

बिजली कटौती पर विवाद
टीवीके ने बिजली गुल होने का आरोप लगाया, लेकिन तमिलनाडु बिजली विभाग ने इसे खारिज कर दिया. विभाग ने कहा कि करूर में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं हुई थी. वास्तव में टीवीके ने अपने जनरेटर और फोकस लाइट्स लगाए थे, जो भीड़ बढ़ने के बीच प्रभावित हो गए.

पुलिस और टीवीके में आरोप-प्रत्यारोप
जहां पुलिस का कहना है कि पार्टी ने तय शर्तों का पालन नहीं किया, वहीं टीवीके ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक नियंत्रण और भीड़ को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में पुलिस नाकाम रही. टीवीके ने इसे भगदड़ की असली वजह बताया और मद्रास हाईकोर्ट में स्वतंत्र जांच की मांग करने का ऐलान किया. पार्टी ने सत्ताधारी डीएमके पर ‘साजिश’ का आरोप लगाया है, जिसे डीएमके ने सख्ती से खारिज कर दिया है.

हाईकोर्ट ने रद्द की तत्काल सुनवाई
रविवार (28 सितंबर, 2025) को मद्रास हाईकोर्ट ने करूर भगदड़ मामले पर प्रस्तावित तत्काल सुनवाई रद्द कर दी. जस्टिस एन. सेंथिलकुमार की अवकाश पीठ ने याचिका पर 4:30 बजे सुनवाई करने का निर्णय लिया था. लेकिन दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने पाया कि यह कोई नई याचिका नहीं बल्कि पहले से लंबित मामले में दायर इम्पलीडिंग पिटीशन है. इसके बाद अदालत ने तत्काल सुनवाई को रद्द कर दिया.



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