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हैदराबाद का तीन नगर निगम में विभाजन, बदला प्रशासनिक नक्शा, तेलंगाना सरकार का ऐतिहासिक फैसला
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हैदराबाद का तीन नगर निगम में विभाजन, बदला प्रशासनिक नक्शा, तेलंगाना सरकार का ऐतिहासिक फैसला

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तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का प्रशासनिक नक्शा बदल गया है. बुधवार, 11 फरवरी को राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए हैदराबाद नगर निगम (GHMC) का विभाजन कर दिया. अब एक निगम की जगह तीन अलग-अलग निकाय होंगे. पहला महात्मा गांधी हैदराबाद नगर निगम, दूसरा नया साइबराबाद नगर निगम और तीसरा मल्काजगिरी नगर निगम.

यह कदम उस समय उठाया गया जब महज एक दिन पहले पुराने GHMC को भंग कर दिया गया था. सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि जहां पहले 150 पार्षद चुने जाते थे, वहीं अब इन तीनों निगमों के लिए कुल 300 पार्षदों के चुनाव होंगे जो इसी वर्ष होने हैं.

सरकारी आदेश में क्या निर्देश जारी हुए हैं? 

सरकारी आदेश के मुताबिक, प्रशासनिक सुगठन के लिए तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. आरवी कर्णन को नए अवशिष्ट GHMC का प्रभारी बनाया गया है, जबकि जी श्रीजना को साइबराबाद और टी विनय कृष्ण रेड्डी को मल्काजगिरी नगर निगम का कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इन तीनों आयुक्तों को महानगर और शहरी विकास विभाग (HMDA) के विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन को रिपोर्ट करना होगा. 

यह विभाजन उस दौरान हुआ है जब कांग्रेस सरकार ने दिसंबर में परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया का ऐलान किया था, जिसका BRS, BJP और AIMIM के नेताओं ने जमकर विरोध किया था. सवाल उठ रहे थे कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों?

वास्तव में, इस पीछे जनगणना (Census) का बड़ा कारण है. GHMC अधिकारियों का कहना है कि 2011 के बाद से जनगणना नहीं हो पाई है और अब 2026 में होने वाली जनगणना से पहले प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी था. कमिश्नर आरवी कर्णन ने स्पष्ट किया था कि 31 दिसंबर तक सब कुछ ठीक करने की समय सीमा भारत सरकार की ओर से तय की गई है.

उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 की वजह से 2021 में जनगणना नहीं हो सकी, इसलिए 2026 की जनगणना सुचारू रूप से हो सके, इसके लिए यह तत्काल कदम उठाना पड़ा.’ शहर के मूल इलाकों में घनी आबादी और बाहरी इलाकों में बिखरी आबादी को देखते हुए इस विभाजन को सही ठहराया गया है, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक चाल बता रहा है. नतीजतन, अब हैदराबाद के चुनावी मैदान में तीन अलग मोर्चे खुलेंगे. पिछले दिनों RWAs और सिविक एक्टिविस्ट्स ने भी इस अभ्यास पर सवाल उठाए थे, लेकिन सरकार ने प्रशासनिक दक्षता और जनगणना की समय सीमा को हवाला देते हुए आदेश जारी कर दिया. 



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