भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में लागू किए गए नए श्रम कानूनों के खिलाफ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के वोट बैंक को लुभाने की कोशिश तेज कर दी है. कांग्रेस का कहना है कि केंद्र की एनडीए सरकार ने मौजूदा 29 श्रम-संबंधी कानूनों को फिर से पैक करके मात्र चार कोड में बदल दिया गया है.
संसद के शीतकालीन सत्र में जोरशोर से उठेगा मुद्दा- तारिक अनवर
बिहार के कटिहार संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, ‘इन चार श्रम कानूनों को एक क्रांतिकारी सुधार की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि इनके नियम अभी तक नोटिफाइड भी नहीं हुए हैं.’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इन नए श्रम कानूनों के खिलाफ पार्टी की इकाई इंटक समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों के साथ बुधवार (26 नवंबर, 2025) को दिल्ली समेत पूरे देश में बड़ा विरोध प्रदर्शन भी करने वाली है. इसके अलावा, इस मुद्दे को संसद के आने वाले शीतकालीन सत्र में जोरशोर के साथ उठाया जाएगा.
कांग्रेस नेता ने श्रम कानूनों पर दागे पांच सवाल
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने चारों श्रम कानूनों को लेकर पांच सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि क्या ये कोड भारत के मजदूरों की श्रमिक न्याय की इन 5 बुनियादी मांगों को हकीकत बना पाएंगे, जिसमें,
- राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन, जिसमें मनरेगा भी शामिल हो.
- स्वास्थ्य का अधिकार कानून, जिसके तहत 25 लाख रुपये का यूनिवर्सल स्वास्थ्य कवरेज मिलेगा.
- शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी कानून.
- सभी असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा, जिसमें जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा भी शामिल हो.
- सरकारी विभागों के कोर कार्यों में कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था को बंद करने की प्रतिबद्धता.
मोदी सरकार को कांग्रेस सरकारों से सीखना चाहिए- तारिक
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘केंद्र की मोदी सरकार को कर्नाटक और राजस्थान में कांग्रेस सरकारों से सीखना चाहिए, जिन्होंने 21वीं सदी के श्रम सुधारों की दिशा में अग्रणी कदम उठाते हुए गिग वर्करों के लिए ऐतिहासिक कानून बनाए और ये कानून नए लेबर कोड लागू होने से पहले ही बन चुके थे.’
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