सुप्रीम कोर्ट ने अरावली खनन मामले पर सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को नया फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने पिछले फैसले पर रोक लगाते हुए इस मामले के अध्ययन के लिए एक नई समिति बनाने के निर्देश दिए हैं. कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट ने अपनी गलती सुधारी है. इसके साथ ही कांग्रेस ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे की भी मांग की है.
कोर्ट ने अपनी गलती सुधारी है: जयराम रमेश
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट को सलाम करता हूं कि उन्होंने इस मामले पर संज्ञान लेकर यह फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गलती सुधारी है. उन्होंने कहा कि मैं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे की मांग करता हूं.
जयराम रमेश ने कहा, ‘अरावली पहाड़ियों पर 164 खनन लीज दिए गए. पहाड़ी को बेचने का काम हो रहा था. अरावली पर्वतमाला पर आखिर कैसे परिभाषा दी गई कि 90 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पहाड़ी मानी जाए.’ उन्होंने कहा कि अब एक्सपोर्ट कमेटी बनाई गई है, मैं उम्मीद करता हूं कि सही समीक्षा होगी.
कांग्रेस नेता का भाजपा पर तंज
वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की चार इंजन की सरकार है. चार राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात) में उनको भी नोटिस दिया गया है. उन्होंने कहा कि हमारा आंदोलन जारी रहेगा.
कोर्ट ने अपने पिछले आदेश पर लगाई रोक
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (29 दिसंबर, 2025) को अरावली पर्वतश्रृंखलाओं की परिभाषा और खनन मामले को लेकर नए फैसले सुनाया. इस फैसले में कोर्ट ने पिछले महीने 20 नवंबर, 2025 को दिए गए अपने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. इसके अलावा, कोर्ट ने अरावली पहाड़ से जुड़े पूरे मामले की गहराई से अध्ययन करने के लिए एक्सपर्ट्स की एक नई उच्च स्तरीय समिति बनाने का भी निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सरकार अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और अरावली रेंज में नई माइनिंग लीज या पुराने लीज के रिन्यूअल पर पूरी तरह से रोक जारी है.
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