केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह असम के नागांव जिले में श्रीमंत शंकरदेव अविर्भाव क्षेत्र के उद्घाटन में पहुंचे. यहां उन्होंने आयोजन में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने सभा को संबोधित किया. शाह ने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भक्ति आंदोलन के जरिए भारत की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत किया है.
अमित शाह ने बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन कार्यक्रम में कहा, ‘मैं आज भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई को भी याद करना चाहता हूं. अगर गोपीनाथ ना होते तो हमारा ये असम और पूरा उत्तर-पूर्व भारत का हिस्सा ना होता. गोपीनाथ जी ही थे जिन्होंने असम को भारत में रखने के लिए जवाहरलाल नेहरू को मजबूर कर दिया.’
‘500 साल पहले शंकरदेव ने एक भारत का संदेश दिया’
उन्होंने कहा, ‘जो लोग भारत को तोड़ना चाहते हैं, उनको 500 साल पहले शंकर देव ने एक भारत का संदेश देने का काम किया था. इसे आज मोदी जी आगे बढ़ा रहे हैं. कोई राजनीतिक बात नहीं करना चाहता, लेकिन जो अच्छा हुआ है उसकी प्रशंसा करनी चाहिए.’
‘हिमंता को बधाई देता हूं, घुसपैठियों को बाहर निकाला’
शाह ने कहा, ‘श्रीमंत शंकर देव के स्मृति स्थान पर बांग्लादेशी घुसपैठिये थे, ये ठीक था क्या? हिमंता जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने इस स्थान से घुसपैठियों को निकाला. एक लाख बीघा से ज्यादा भूमि घुसपैठियों से मुक्त कराई गई है. काजीरंगा में भी घुसपैठियों ने कब्जा कर लिया था. कांग्रेस पार्टी इनको सालों तक आगे बढ़ाती रही.’
‘IMDT एक्ट लाकर घुसपैठियों को बसाया गया’
उन्होंने कहा, ‘1983 में आईएमडीटी एक्ट लाकर उन्होंने घुसपैठिये को यहां बसाने का कानूनी रास्ता बना दिया. श्रीमत शंकर देव की भूमि पर कहना चाहता हूं कि बीजेपी का संकल्प है कि न केवल असम बल्कि पूरे देश से घुसपैठियों को निकालने का काम करेंगे.’
हिमंत बिस्वा सरमा ने यहां की संस्कृति को घुसपैठियों के प्रभाव से मुक्त किया. कांग्रेस सरकार इतने साल रही, उन्होंने असम आंदोलन के शहीदों के लिए कुछ नहीं किया. असम के विकास के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व में हर तरह के विकास के काम हुए.


