कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर राजनीतिक तूफान के केंद्र में आ गए हैं. एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान ने न केवल कांग्रेस के भीतर हलचल पैदा की बल्कि विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है. थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेश नीति किसी एक राजनीतिक दल की नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश की नीति होती है. उनके इस बयान को राहुल गांधी और उनके कथित भारत-विरोधी प्रचार की अप्रत्यक्ष आलोचना के रूप में देखा जा रहा है.
थरूर के बयान ऐसे समय में आए हैं जब विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेरता रहा है. ऐसे में एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की तरफ से राष्ट्रीय एकता और विदेश नीति में सर्वदलीय दृष्टिकोण की बात करना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. बयान के बाद कांग्रेस के भीतर असहजता और बाहर समर्थन दोनों ही देखने को मिले. शशि थरूर के बयान के बाद मीडिया ने उनसे सवाल किया और पूछा कि आप बीजेपी के पक्ष में बयान क्यों देते हैं. इस पर उन्होंने कहा कहा, “मैं जो कुछ भी कहता हूं, जो कुछ भी लिखता हूं, उसे ध्यान से सुनें, दूसरों के बयानों पर भरोसा न करें. मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.”
#WATCH | Delhi | On being asked about his statements in support of the BJP, Congress MP Shashi Tharoor says, “Hear whatever I say, read whatever I write. Don’t go by others’ versions. I am saying it clearly that nothing as such has happened…” pic.twitter.com/0NNWUW4aei
— ANI (@ANI) December 28, 2025
विदेश नीति पर शशि थरूर की टिप्पणी और उसका राजनीतिक संदेश
शशि थरूर ने अपने बयान में यह रेखांकित किया कि विदेश नीति को घरेलू राजनीति का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए. उनका कहना था कि जब कोई नेता अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है तो वह किसी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का चेहरा होता है. इस टिप्पणी को सीधे तौर पर राहुल गांधी के हालिया बयानों से जोड़कर देखा गया, जिनमें उन्होंने विदेशी धरती पर भारत सरकार की आलोचना की थी.
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