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‘पुरी के दो शंकराचार्यों के शिविर कैसे लगे?’, प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन के भेजे नोटिस पर ब
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‘पुरी के दो शंकराचार्यों के शिविर कैसे लगे?’, प्रयागराज में माघ मेला प्रशासन के भेजे नोटिस पर ब

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शंकराचार्य पदवी को लेकर माघ मेला प्रशासन की ओर से नोटिस भेजे जाने से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को सवाल किया कि आखिर मेला प्रशासन को इसी माघ मेले में पुरी के दूसरे शंकराचार्य का बोर्ड क्यों नहीं दिखता.

उन्होंने कहा, ‘आप (मेला प्रशासन) कहते हैं कि जो शंकराचार्य नहीं है वह क्यों शंकराचार्य लिख रहा है. पुरी के शंकराचार्य जी प्रयागराज आए हुए हैं और उनका शिविर भी लगा है. उनके शिविर के पास ही पुरी के दूसरे शंकराचार्य अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज, गोवर्धन पीठ शंकराचार्य का बोर्ड लगा है. पुरी के दो शंकराचार्य कैसे हो सकते हैं.’

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘आज मेला प्रशासन ने पुरी के असली शंकराचार्य को प्रताड़ित करने के लिए एक दूसरे शंकराचार्य को शिविर लगाने की अनुमति दी है क्योंकि पुरी के असली शंकराचार्य धर्म युक्त बातें बोलते हैं.’

मामले में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने क्या कहा?

इस नोटिस प्रकरण पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘घोर निंदनीय, प्रमाण पत्र मांगने वाले पहले खुद अपना प्रमाण पत्र दें. विभाजनकारी भाजपाई और उनके संगी साथियों की सोच इस हद तक गिर जाएगी ये किसी ने नहीं सोचा था. भाजपा सत्ता और धन के सिवा किसी की भी सगी नहीं है. अहंकार तो दशमुखी का भी नहीं बचा था, इन एक मुखी का क्या बचेगा.’

ज्योतिष्पीठ का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है: अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘उनको नोटिस नहीं जाएगा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जाएगा क्योंकि अविमुक्तेश्वरानंद गौरक्षा की मांग करता है. नोटिस का जवाब ई-मेल से आज भेज दिया जाएगा. साथ ही मेला प्रशासन को एक नोटिस भेजकर पूछा जाएगा कि वे सुप्रीम कोर्ट के आधे अधूरे आदेश क्यों दिखा रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘जब ज्योतिष्पीठ का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तो मेला प्रशासन कैसे तय कर सकता है कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं है.’

उन्होंने कहा कि सबसे पहले 1999 में इलाहाबाद के जनपद न्यायालय में ज्योतिष्पीठ को लेकर वाद चला था, जिसमें निर्णय आया था कि स्वामी वासुदेवानंद जी ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में काम ना करें. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में कहा कि स्वामी वासुदेवानंद दंडी संन्यासी सिद्ध नहीं होते हैं.’

महाकुंभ 2025 में मेरा उल्लेख शंकराचार्य के रूप में किया गया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘वासुदेवानंद सुप्रीम कोर्ट गए, जहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है, लेकिन उनके शिविर के बाहर लगे बोर्ड में जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर जरूर लिखा है. उस बोर्ड पर नोटिस नहीं जाएगा, क्योंकि उस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इनको संज्ञान नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘महाकुंभ प्रयागराज-2025 की सरकारी स्मारिका में मेरी फोटो के साथ मेरा उल्लेख ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य के रूप में किया गया है. वहीं, यह मेला प्रशासन पूछता है कि आपने अपने नाम के सम्मुख शंकराचार्य क्यों लगाया है.’

मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जारी किया नोटिस

मेला प्रशासन ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर पूछा कि वह ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वयं को कैसे प्रचारित/प्रसारित कर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता. माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन की ओर से कथित तौर पर रोके जाने के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हैं और उन्होंने मेला प्रशासन को निशाने पर ले रखा है.

यह भी पढ़ेंः ‘एजेंसियां तो अपना काम करेंगी’, I-PAC दफ्तर में ED रेड पर बोले धर्मेंद्र प्रधान, abp न्यूज के मंच से ममता बनर्जी पर बोला हमला



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