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बिहार में वोट कटवा बनकर उभरे PK, ओवैसी-मायावती ने MGB को कितनी सीटों पर पहुंचाया नुकसान?
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बिहार में वोट कटवा बनकर उभरे PK, ओवैसी-मायावती ने MGB को कितनी सीटों पर पहुंचाया नुकसान?

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बिहार विधानसभा 2025 चुनाव के नतीजों ने न सिर्फ NDA खेमे को भर-भरकर खुशियां दी हैं. बल्कि, इस राजनीतिक मोड़ ने 2010 में हुए चुनावों की याद दिला दी है. जब NDA सत्ता में आई थी, उसी को इस बार जनता ने फिर से चुना है. इस बार बिहार की जनता ने NDA को 202 सीटें दी हैं. इधर, महागठबंधन (MGB) 35 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाया है. ये रिजल्ट दोनों के लिए हैरान करने वाला और अप्रत्याशित रहा है. 

इन सब राजनीतिक बयानबाजी से इतर इस चुनाव में जो सबसे ज्यादा हैरान करने वाला रहा है, वो है प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी, मायावती की बीएसपी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम. इन तीन दलों ने विपक्षी गठबंधन को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया है.  

जनसुराज ने कितनी सीटों पर पहुंचाया MGB को नुकसान? 

इस चुनाव में जो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र थी, वो पार्टी जनसुराज रही. यह राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की राजनीतिक पार्टी है, जोकि पहली बार चुनाव में उतरी थी. जनसुराज के खाते में एक भी सीट नहीं आई. पार्टी की तरफ कुल वोट शेयर 3.4% ही रहा. हालांकि, इस पार्टी ने बिहार की राजनीति में मुद्दों के आधार पर उथलपुथल मचाने का काम जरूर किया. पूरे चुनाव को जरूरी मुद्दों की तरफ मोड़ दिया. अगर देखा जाए तो प्रशांत किशोर की पार्टी महागठबंधन के लिए वोट कटवा पार्टी के रूप में साबित हुई. 

अगर आंकड़ो पर नजर डालें, तो जनसुराज ने कुल 238 सीटों पर चुनाव लड़ा. इनमें वो एक जगह ही दूसरे नंबर की पार्टी बनी. 129 सीटों पर तीसरे नंबर की पार्टी बनी. 73 सीटों पर वो चौथे नंबर की पार्टी रही. 24 सीटों पर पांचवे नंबर की पार्टी बनी. 12 सीटों पर वो छठे से नौवें स्थान पर रही.

इन आधार पर माना जा सकता है कि एनडीए और महागठबंधन को नुकसान पहुंचाने में जनसुराज ने कोई कसर नहीं छोड़ी. 33 ऐसी जगह भी रही, जहां जनसुराज का वोट शेयर जीत के अंतर से ज्यादा था. इन 33 में से एनडीए ने 18 और महागठबंधन ने 13 सीटें जीतीं. 

मायावती की BSP ने कितनी सीटों पर किया खेल?

बसपा और ओवैसी की पार्टी AIMIM का प्रभाव भी इन पर देखने को मिला. इसमें मायावती की बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा ने 181 सीटों पर चुनाव लड़ा था. हालांकि पार्टी को एक ही सीट मिल सकी, वहीं एक अन्य सीट पर वो दूसरे नंबर की पार्टी रही. आंकड़ों पर नजर डालें तो 20 ऐसी सीट हैं, जहां बसपा को जीत के अंतर से अधिक वोट मिले हैं. इनमें एनडीए ने एक और महागठबंधन ने दो सीटें जीती हैं. मतलब साफ है कि बसपा 90% सीटों पर एनडीए की जीत का आधार लिख गई. 

ओवैसी ने सीमांचल में तोड़ी MGB की कमर!  

ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया. पार्टी ने सीमांचल इलाके में पांच सीटें जीती और एक जगह दूसरे नंबर की पार्टी रही. इसके अलावा 9 ऐसी सीट रहीं, जहां उसने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है. मतलब जीत के अंतर से अधिक वोट हासिल किए हैं. इसमें 67% सीटें एनडीए और 33% सीटें महागठबंधन ने जीती. 

महागठबंधन का सबसे खराब प्रदर्शन

अगर महागठबंधन के मुख्य दलों पर नजर डालें तो राजद और कांग्रेस के लिए सबसे खराब चुनाव रहा. चुनाव दो धुरी का न होकर मल्टी डाइमेंशन में बदल गया और जो सीधे तौर पर एनडीए के पक्ष में साबित हुआ. आरजेडी को 23.4 प्रतिशत वोट जरूर मिले, लेकिन उसे सिर्फ 25 सीटें ही मिल सकीं. इधर, भाजपा का वोट प्रतिशत 20.4% रहा, वहीं जदयू का 19.6% रहा, लेकिन सभी ने तीन गुना से भी ज्यादा सीटें जीतीं.  

ऐसी रही आंकड़ों में चुनाव की पूरी पिक्चर

अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो 243 सीटों में से 63 पर जनसुराज, बसपा और AIMIM का सीधा असर देखने को मिला. इनमें एनडीए ने 44 (करीब 70%) सीटें जीतीं. महागठबंधन ने 19 सीटें जीतीं. मतलब इस चुनाव में लड़ाई दो तरफा न होकर तीन तरफा हो गई. इससे वोट बंट गए और सीधे तौर पर एनडीए की जीत को सुनिश्चित कर गए. 



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