Bengaluru News: कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरू में 23 साल की डेंटल स्टूडेंट यशस्विनी बी की आत्महत्या करने के मामले में अब एक नया मोड़ या गया है. यशस्विनी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. अब घटना के कुछ दिनों बाद उसकी मां ने कॉलेज के छह लेक्चररों पर बेटी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है.
ज़ीरो एफआईआर दर्ज, छह लेक्चररों के खिलाफ केस
यशस्विनी की मां जी प्रमिला की शिकायत के बुनियाद पर, बेंगलुरु ग्रामीण जिले के सूर्यनगर पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज की है, जिसे बोम्मनहल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है.
शुरुआत में, पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज किया था. हालांकि, रविवार को उन्होंने होसुर रोड स्थित ऑक्सफोर्ड डेंटल कॉलेज के कुछ लेक्चररों द्वारा लगातार उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद एक नया मामला दर्ज किया गया.
उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज किया है. एफआईआर में लेक्चरर डॉ. अनमोल, डॉ. अल्बा, डॉ. शबाना, डॉ. फैका, डॉ. सिंधु और डॉ. सुष्मिनी के नाम शामिल हैं.
सुसाइड नोट में खुद को जिम्मेदार बताया
यशस्विनी ने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उसने कहा था कि अपनी मौत के लिए वह खुद जिम्मेदार है और किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. यह पत्र एफएसएल (विदेशी मानक सेवा विभाग) को भेजा गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि लिखावट उसी की है या नहीं.
नोट में लिखी बातों के बावजूद, प्रमिला ने जोर देकर कहा कि पिछले एक साल से उसकी बेटी को शिक्षकों द्वारा लगातार उत्पीड़न और अपमान का सामना करना पड़ रहा था.
क्लास में अपमान, रंग और पहनावे पर टिप्पणियों का आरोप
उसने दावा किया कि यशस्विनी को क्लास में कुछ मिनट देर से आने पर अक्सर डांट पड़ती थी और कथित तौर पर उसके पहनावे के तरीके को लेकर भी टिप्पणियां की जाती थीं.
जब यशस्विनी ने इन टिप्पणियों का जवाब नहीं दिया, तो शिक्षकों ने कथित तौर पर सेमिनारों में उसे कम अंक दिए. यशस्विनी ने कई बार कॉलेज में झेली गई पीड़ा और अपमान के बारे में घर पर बताया था.
प्रमिला ने आगे बताया कि 8 जनवरी को, मौत से एक दिन पहले यशस्विनी को आंखों में दर्द हुआ और उसने क्लास छोड़ दी. अगले दिन जब वह कॉलेज पहुंची, तो कथित तौर पर उसके सहपाठियों के सामने उसका अपमान किया गया और उससे ली गई दवाओं के बारे में भी पूछताछ की.
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि लेक्चररों ने यशस्विनी के त्वचा के रंग के बारे में टिप्पणी की और यहां तक कह दिया कि “इस चेहरे के साथ” वह डॉक्टर बनने के बारे में क्यों सोच रही है.


