सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को टेरर फंडिंग मामले में यह कहते हुए जमानत दी है कि अगर मुकदमा समय पर समाप्त होने की संभावना नहीं हो तो निरंतर हिरासत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का कारण बन सकती है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 12 मार्च के अपने आदेश में कहा कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है और शब्बीर शाह लंबे समय से हिरासत में रहे हैं. हालांकि, बेंच ने शब्बीर शाह पर कड़ी जमानत शर्तें भी लागू की हैं, जिनमें मामले के बारे में मीडिया में कोई टिप्पणी न करने का आदेश भी शामिल है.
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने शब्बीर शाह को चार जून 2019 को गिरफ्तार किया था. बेंच ने कहा, ‘शब्बीर अहमद शाह आठ साल से अधिक समय तक कारावास में रहे हैं. किसी आरोपी की लंबी हिरासत, विशेषकर ऐसी परिस्थितियों में जहां मुकदमे में बहुत कम या कोई वास्तविक प्रगति नहीं हुई हो, जमानत के मामले में निर्णय लेने में एक महत्वपूर्ण कारक है.’
आदेश में यह रेखांकित किया गया कि अगर मुकदमा समय पर समाप्त होने की संभावना नहीं है, तो निरंतर हिरासत संविधान में प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के हनन का कारण बन सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना और यह देखते हुए कि मुकदमे के जल्दी निपटने की संभावना कम है और अपीलकर्ता की लंबी हिरासत अवधि और उनकी वृद्धावस्था को ध्यान में रखते हुए, हम अपीलकर्ता को मुकदमे के लंबित रहने के दौरान जमानत देने के इच्छुक हैं.’
बेंच ने कहा कि शब्बीर अहमद शाह निचली अदालत के समक्ष एक शपथ-पत्र प्रस्तुत करेंगे कि जमानत पर रहते हुए वह समान प्रकृति का कोई और अपराध नहीं करेंगे और वर्तमान मामले में अपनी भूमिका के बारे में मीडिया में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. आदेश में कहा गया कि अगर शब्बीर अहमद शाह ने किसी भी जमानत शर्त का उल्लंघन किया, तो अभियोजन पक्ष उन्हें मिली राहत रद्द करने का अनुरोध कर सकता है.
बेंच ने यह आदेश शब्बीर शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस की दलीलें सुनने के बाद पारित किया. एनआईए की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए. बेंच ने सुनवाई के दौरान मुकदमे में कई विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया और शब्बीर शाह की लंबी हिरासत को भी रेखांकित किया.
यह भी पढ़ें:-
‘पहले से थी जीत की उम्मीद..’ राज्यसभा के चुनाव के नतीजों के बाद नितिन नवीन का पहला रिएक्शन, जानिए क्या कहा?


