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पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेगा पाकिस्तान! जानें किस प्रोजेक्ट पर काम करने वाला है भारत?
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पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेगा पाकिस्तान! जानें किस प्रोजेक्ट पर काम करने वाला है भारत?

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव बढ़ गया था. इसके बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह संधि शांति के समय के लिए थी और अगर पाकिस्तान शांति बनाए रखने को तैयार नहीं है तो समझौते की समीक्षा की जा सकती है.अब इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर सरकार ने चार दशक से बंद पड़ी वुलर बैराज परियोजना, जिसे तुलबुल परियोजना भी कहा जाता है. उसे दोबारा शुरू करने की तैयारी की है. इस परियोजना का उद्देश्य झेलम नदी के पानी को स्टोर करना और उसके फ्लो को नियंत्रित करना है.

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक वुलर बैराज परियोजना को पहले सिंधु जल संधि के प्रावधानों के कारण रोक दिया गया था. इस योजना के लिए एशियाई बैंक से फंडिंग भी ली गई थी, लेकिन बाद में काम ठप हो गया. अब जब संधि निलंबित हो चुकी है तो उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार केंद्र के साथ मिलकर इसे आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. अधिकारियों के अनुसार, केंद्र और प्रदेश सरकार जल्द ही इस पर संयुक्त रूप से काम शुरू करेंगी. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया था कि राज्य सरकार दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है. इनमें अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर को जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल परियोजना शामिल है.

वुलर झील की वर्तमान स्थिति

वुलर झील का आकार झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार बदलता रहता है. इसका न्यूनतम क्षेत्रफल लगभग 20 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है.सर्दियों में झेलम का जल प्रवाह कम होने से झील के कई हिस्से सूख जाते हैं. इससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होती है.

स्थानीय लोगों को उम्मीद

बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक सैकड़ों लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए इस झील पर निर्भर हैं. झील के सिकुड़ने से उनकी आय पर असर पड़ा है.स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वुलर बैराज परियोजना फिर से शुरू होती है तो जल भंडारण बेहतर होगा और उनकी पारंपरिक आजीविका को सहारा मिलेगा.

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

सिंधु जल संधि निलंबन के बाद पाकिस्तान की ओर से लगातार बयान दिए गए हैं. पाकिस्तान ने चेतावनी दी थी कि यदि पानी रोका गया तो इसे युद्ध जैसा कदम माना जाएगा. हालांकि भारत सरकार ने अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही है. अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से वुलर बैराज परियोजना को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.यह परियोजना आने वाले समय में क्षेत्रीय जल प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.



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