एक महिला वकील ने नोएडा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्हें जबरदस्ती हिरासत में रखा गया, बंदूक दिखाकर धमकाया गया और पुलिस स्टेशन में उनका यौन उत्पीड़न किया गया. महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (19 दिसंबर, 2025) को याचिका दाखिल करके बताया कि पुलिस स्टेशन को सील करके उनके मुवक्किल के साथ मारपीट भी की गई और अब भी उन्हें धमकियां मिल रही हैं.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता वकील ने बताया कि अपने मुवक्किल पर हमले की शिकायत के लिए वह कोर्ट गई थीं, जब उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई तो उन्होंने सीनियर अधिकारियों से बात करने को कहा. तब पुलिस स्टेशन को सील कर दिया और उनके मुवक्किल की पिटाई की गई, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं. वकील ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने अगले दिन उन्हें किसी लिखित नोटिस के हिरासत में ले लिया और यहां उनको डेढ़ घंटे रखकर उनके साथ छेड़छाड़ की गई, शिकायत दर्ज न करने के लिए धमकाया गया और अश्लील बातें बोली गईं. एक पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा, ‘तेरी जैसी वकीलों को हम रोज रात…’
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने पहले तो याचिकाकर्ता वकील से पूछा कि वह नोएडा में रहती हैं तो वह इलाहाबाद हाईकोर्ट क्यों नहीं गईं, लेकिन बाद में कोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई के लिए तैयार हो गया. सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने याचिकाकर्ता वकील की ओर से कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और पुलिस स्टेशन में वकील का यौन उत्पीड़न किया गया. उन्होंने अनुरोध किया है कि सीसीटीव फुटेज को डिलीट होने से पहले ही सीज कर लिया जाए.’
सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पवनी भी याचिकाकर्ता के लिए पेश हुईं और उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकायरियों ने उनकी मुवक्किल का मोबाइल फोन सीज कर लिया है और सभी वीडियोज डिलीट कर दिए हैं. उन्होंने चिंता जताई है कि वकील की जान को खतरा है.
एडवोकेट विकास सिंह ने कोर्ट को यह भी बताया कि पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और उनके सही से काम करने का मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. ऐसे में इस मामले को टेस्ट केस की तरह लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के लिए एक संदेश होना चाहिए कि किसी वकील के साथ इस तरह की हरकत बिल्कुल गलत है. इस पर कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह देखें कि घटना के वक्त की फुटेज डिलीट न हो और उसको सील कर लें.
एडवोकेट महालक्ष्मी ने भी कहा कि अगर वकीलों के साथ ऐसी घटनाएं हो सकती हैं तो सामान्य लोगों के लिए तो क्या ही स्थिति होगी. कोर्ट ने कहा कि अगर उसने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह मामला सुना तो पूरी दिल्ली के मामले यहां आने शुरू हो जाएंगे. यह अनुच्छेद सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अधिकार देता है. कोर्ट ने कहा, ‘वैसे हम याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिए कहते, लेकिन याचिकाकर्ता ने काफी गंभीर आरोप लगाए हैं और यह देखते हुए कि पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और उनके ठीक से काम करने का मामला कोर्ट में लंबित है, तो हम यह मामला सुनेंगे.’ इसके बाद कोर्ट ने 7 जनवरी, 2026 को सुनवाई के लिए मामला लिस्ट कर दिया है.
याचिका के अनुसार यह घटना नोएडा के सेक्टर 126 के पुलिस स्टेशन की है, जहां 3 दिसंबर को महिला वकील के साथ छेड़ाछाड़ हुई और जबरदस्ती उनको हिरासत में रखा गया. वकील के सिर में गंभीर चोटें भी आई हैं. याचिकाकर्ता ने बताया कि वह वकील की ड्रेस और आईडी के साथ अपने मुवक्किल पर हमले की एफआईआर करवाने गई थीं. उनका आरोप है कि जिन लोगों ने मुवक्किल पर हमला किया, वे एक नेशनल न्यूज चैनल से जुड़े हैं. मुवक्किल की मेडिकल रिपोर्ट में भी सामने आया कि उन्हें काफी चोटें आई हैं.
जब वकील एफआईआर करवाने पुलिस स्टेशन गईं तो दो पुलिस अधिकारियों ने शिकायत लिखने से मना कर दिया. इसके बाद वकील ने पुलिस इमरजेंसी रिस्पोंस सर्विस पर कॉल करने की कोशिश, लेकिन पुलिस स्टेशन सील कर दिया गया और उनके क्लाइंट को मारा गया. वकील ने बताया कि अगले दिन उन्हें बिना किसी लिखित कारण के एक से डेढ़ घंटे हिरासत में रखा गया.
याचिका के अनुसार हिरासत के दौरान एक पुलिस अधिकारी ने वकील का कोट फाड़ दिया और उनकी तलाशी लेने लगा, बंदूक दिखाकर उन्हें धमकाया और उनसे अश्लील बातें कहीं. याचिका के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘तेरी जैसी वकीलों को रोज रात…’ याचिका के अनुसार वकील का फोन सीज कर लिया गया, उनके फोन से वीडियोज डिलीट कर दी गईं और पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों को डिसएबल कर दिया गया या हटा दिया गया. याचिकाकर्ता वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया. उन्होंने कहा कि भले ही वकील को थोड़ी देर बाद ही छोड़ दिया गया था, लेकिन उन्हें अभी भी धमकियां मिल रही हैं.
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