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बिना टिकट यात्रा पर पश्चिम रेलवे की सख्ती, 10 महीनों में 172 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना
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बिना टिकट यात्रा पर पश्चिम रेलवे की सख्ती, 10 महीनों में 172 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना

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बिना टिकट और अनियमित यात्रा पर लगाम लगाने के लिए पश्चिम रेलवे द्वारा चलाए गए व्यापक टिकट जांच अभियानों के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच पश्चिम रेलवे ने गहन जांच के जरिए 27 लाख से अधिक मामलों का पता लगाते हुए 172.55 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की है. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 47 प्रतिशत अधिक है.

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के अनुसार, वरिष्ठ वाणिज्य अधिकारियों की निगरानी में टिकट जांच स्टाफ ने मुंबई उपनगरीय सेवाओं के साथ-साथ मेल-एक्सप्रेस, पैसेंजर और हॉलिडे स्पेशल ट्रेनों में लगातार अभियान चलाए. इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य राजस्व संरक्षण के साथ-साथ यात्रियों में अनुशासित यात्रा को बढ़ावा देना रहा.

जनवरी 2026 में ही 17 करोड़ रुपये की वसूली

सिर्फ जनवरी 2026 के दौरान बिना टिकट और अनियमित यात्रा के 2.82 लाख मामले दर्ज किए गए, जिनसे 17 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया. यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है.

मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर विशेष फोकस 

मुंबई उपनगरीय खंड में चलाए गए अभियानों के तहत जनवरी 2026 में 1.02 लाख मामलों से 4.34 करोड़ रुपये की वसूली हुई. वहीं, अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच कुल 9.75 लाख मामलों में 45.60 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जिसमें एसी लोकल से प्राप्त राशि भी शामिल है.

एसी लोकल में अनधिकृत यात्रा पर कार्रवाई तेज

पश्चिम रेलवे ने एसी उपनगरीय लोकल ट्रेनों में भी नियमित औचक जांच जारी रखी. इस दौरान 1 लाख से अधिक मामलों में 3.38 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 97 प्रतिशत अधिक है.

नकली यूटीएस पास से यात्रा, महिला टिकट जांच कर्मी ने पकड़ा मामला
मुंबई मंडल में नकली और जाली यूटीएस टिकटों के खिलाफ संयुक्त अभियान के दौरान एक धोखाधड़ी का मामला सामने आया. विरार जाने वाली लोकल ट्रेन में तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक दीपिका मूर्ति ने महिला प्रथम श्रेणी डिब्बे में एक यात्री के मोबाइल पर दिखाए गए वर्चुअल यूटीएस एसी लोकल पास को संदिग्ध पाया. जांच में स्पष्ट हुआ कि पास आधिकारिक यूटीएस सिस्टम से जारी नहीं किया गया था.

यात्री को बांद्रा स्टेशन पर उतारकर पूछताछ की गई, जहां उसने स्वीकार किया कि यह पास व्हाट्सएप के माध्यम से मिले एक फर्जी एप्लिकेशन से बनाया गया था. रेलवे सुरक्षा बल की मदद से यात्री को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए रेलवे पुलिस को सौंप दिया गया. पश्चिम रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध टिकट या पास के साथ ही यात्रा करें और किसी भी प्रकार के फर्जी एप या टिकट के झांसे में न आएं.



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