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‘बंगाल में मतदाता सूची से एक भी नाम हटा तो…’, अभिषेक बनर्जी की चुनाव आयोग को खुली चुनौती
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‘बंगाल में मतदाता सूची से एक भी नाम हटा तो…’, अभिषेक बनर्जी की चुनाव आयोग को खुली चुनौती

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार (08 अगस्त, 2025) को कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में एक भी नाम अंतिम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाया गया तो पार्टी राज्य के एक लाख लोगों के साथ निर्वाचन आयोग का घेराव करेगी.

नयी दिल्ली से लौटने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए डायमंड हार्बर के सांसद बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूचियों का प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) बंगाल में नहीं होने दिया जाएगा.

गरीब लोगों का छीना जाएगा हक

बनर्जी ने कहा, ‘मेरी पार्टी का रुख साफ है, जिस तरह से भाजपा बंगाल में एसआईआर लागू करना चाहती है, यानी एक-दो साल की प्रक्रिया को सिर्फ एक-दो महीने में समेटना चाहती है, उसका नतीजा यह होगा कि सबसे पहले गरीब लोग सूची से बाहर हो जाएंगे. बिहार में 65 लाख नाम हटाए गए हैं.’

उन्होंने कहा, ‘बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं होगा. अगर एक भी नाम हटाया गया तो हम एक लाख बंगालियों के साथ निर्वाचन आयोग का घेराव करेंगे.’ इससे पहले बनर्जी ने कहा कि न तो उनकी पार्टी और न ही ‘इंडिया’ गठबंधन के किसी घटक दल का संसद में कामकाज बाधित करने का कोई इरादा है, लेकिन मतदाता सूची के एसआईआर पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का किया समर्थन

उन्होंने कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में हेराफेरी के कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन किया. बनर्जी ने कहा कि राहुल गांधी के दावों की जांच होनी चाहिए. हाल में लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता नियुक्त किए गए बनर्जी ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि सदन चले, लेकिन एसआईआर पर चर्चा किए बिना नहीं.’

उन्होंने कहा, ‘मतदाता सूची में विसंगतियों की बात करता है तो फिर 2024 के आम चुनाव पुरानी सूचियों का उपयोग करके कैसे कराए गए? क्या प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और अन्य कैबिनेट मंत्री त्रुटिपूर्ण जनादेश का उपयोग कर चुनाव जीते?’

दो साल की प्रक्रिया दो महीने में कैसे होगी पूरी?

बनर्जी ने सवाल किया, ‘दो साल की प्रक्रिया दो महीने में कैसे पूरी हो सकती है?’ बनर्जी ने चिंता व्यक्त की है कि एसआईआर की कवायद का भाजपा के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, खासकर उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां पिछले चुनावों में जीत का अंतर बहुत कम था.

उन्होंने कहा, ‘पिछले लोकसभा चुनावों में भाजपा बालुरघाट और बिष्णुपुर जैसी जगहों पर बहुत कम अंतर से जीत गई थी. हम बंगाल में एसआईआर की अनुमति नहीं देंगे.’ बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों के उत्पीड़न के तृणमूल कांग्रेस के आरोपों पर भी बात की. उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के गरीब नागरिकों को क्यों परेशान किया जाए.’

वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश

तृणमूल कांग्रेस सांसद ने निर्वाचन आयोग (ईसी) पर भाजपा के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया और कहा कि पश्चिम बंगाल में जानबूझकर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची गई थी. यह पूछे जाने पर कि क्या उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में आम सहमति वाले किसी उम्मीदवार के नाम पर कोई चर्चा हुई है, उन्होंने कहा, ‘अभी तक ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है. हम उचित समय पर इस मामले पर फैसला करेंगे.’

ये भी पढ़ें:- चुनाव आयोग पर धांधली के आरोपों को लेकर राहुल गांधी ने बेंगलुरु में की ‘वोट अधिकार रैली’



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