पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में विरोध प्रदर्शन चल रहा है. गुरुवार को आदिवासी महिला की पिटाई के विरोध को लेकर लोग सड़कों पर उतरे हैं. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को वाटर केनन और स्मोग गन का इस्तेमाल करना पड़ा.
आदिवासियों ने उत्तर बंगाल सचिवालय की ओर विरोध मार्च निकाला. इसी को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें और स्मोक गन का इस्तेमाल किया है. प्रदर्शन कर रहे लोगों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठी चार्ज किया गया.
#WATCH | Siliguri, West Bengal | Police use water cannon and tear gas to disperse people from the tribal communities who are holding a protest march towards Uttar Kanya – Branch Secretariat of the state govt, alleging incidents of torture and harassment against them pic.twitter.com/iJFfSyPXI2
— ANI (@ANI) February 26, 2026
आदिवासी उत्तर-कन्या ब्रांच सेक्रेटेरिएट की ओर विरोध मार्च निकाल रहे थे. उन्होंने आदिवासियों पर अत्याचार और परेशान करने वाली घटनाओं का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारियों को संभालने के लिए भारी पुलिस बल पहले से तैनात किया गया.
आदिवासी माहिला की पिटाई को लेकर आदिवासी समाज का प्रदर्शन
मामला एक आदिवासी महिला से जुड़ा है. फांसीदेवा में एक गर्भवती आदिवासी महिला पर बेरहमी से हमला किया गया था. इस दौरान उसके बच्चे की मौत हो गई. इसी को लेकर आदिवासी समाज के लोग मार्च निकाल रहे थे. वहां मौके पर पहले से तैनात पुलिस बल ने इस दौरान मार्च रोका.
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पहले बैरिकोड को तोड़ दिया था. इसके बाद पुलिस ने स्थिति को काबू करने के लिए और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सभी पर लाठी चार्ज किया गया. आज का मुद्दा पुलिस और सरकार के लिए है. आदिवासी महिला को पीटा गया है. उसके बच्चे को मारा. यहां पर कोई कानून नहीं है.
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी समाज के लोग भगवा झंडे और तिरंगे के साथ नजर आए. इस साल बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य में सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है. हालांकि, यह प्रदर्शन आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर किया जा रहा है. पुलिस ने इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया है.


