West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ती जा रही है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, विपक्षी बीजेपी, कांग्रेस और वाम दल सभी अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं. इसी बीच बीजेपी के कुछ वरिष्ठ नेता कांग्रेस, माकपा और तृणमूल के एक वर्ग से पार्टी में आने की अपील कर रहे हैं. इस आह्वान पर कांग्रेस और माकपा ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने उत्तर दिनाजपुर के रायगंज में आयोजित परिवर्तन संकल्प सभा से कांग्रेस नेताओं को बीजेपी में शामिल होने का आह्वान किया. उन्होंने खास तौर पर पूर्व कांग्रेस विधायक मोहित सेनगुप्ता का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस अब कमजोर हो चुकी है और अगर ममता बनर्जी सरकार को हटाना है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ थामना होगा.
मछली खाने-कॉफी पीने से नहीं जाएंगी ममता- मजूमदार
सुकांत मजूमदार ने कहा कि नबन्ना जाकर मछली और कॉफी पीने से ममता बनर्जी नहीं हटेंगी. अगर ममता बनर्जी को हटाना ही है तो नरेंद्र मोदी का हाथ थामिए.” उन्होंने कहा कि केवल नबन्ना जाकर मुलाकात करने से या प्रतीकात्मक विरोध से सरकार नहीं बदलेगी, इसके लिए मजबूत राजनीतिक मंच की जरूरत है.
बीजेपी के इस प्रस्ताव को कांग्रेस ने सिरे से खारिज कर दिया. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहित सेनगुप्ता ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी एक मुस्लिम विरोधी पार्टी है और उसमें शामिल होना उनके लिए आत्महत्या के समान होगा.
उन्होंने ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच सेटिंग का आरोप भी लगाया और सवाल उठाया कि देशभर में गिरफ्तारी हो रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल में कथित अन्याय के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही. कांग्रेस नेता ने साफ कहा कि वे जाति-धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करते हैं और बीजेपी में जाने का सवाल ही नहीं उठता.
मिथुन चक्रवर्ती की अपील- कम्युनिस्टों और तृणमूल को भी संदेश
बीजेपी नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने बीरभूम के दुबराजपुर में आयोजित जनसभा में अलग ही सुर छेड़ा. उन्होंने कम्युनिस्टों, कांग्रेसियों और यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस के “ईमानदार हिंदू” कार्यकर्ताओं से बीजेपी के साथ आने की अपील की.
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार से दूर हैं और जिनमें विवेक है, उन्हें एक साथ आकर सरकार को हटाने के लिए वोट करना चाहिए. उनका संदेश साफ था, बीजेपी सभी विपक्षी ताकतों को एक मंच पर लाना चाहती है.
बीजेपी में जनशक्ति की कमी- माकपा
बीजेपी के इन आह्वानों पर माकपा ने कटाक्ष किया है. माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि बीजेपी खुद अयोग्य साबित हो चुकी है, इसलिए अब दूसरों को बुला रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ही तृणमूल के कई नेता बीजेपी में जा चुके हैं और अब जब वे संकट में हैं, तो बीजेपी बाकी दलों के नेताओं को भी लुभाने की कोशिश कर रही है. माकपा का मानना है कि इससे बीजेपी की कमजोरी उजागर होती है.
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले दल-बदल कोई नई बात नहीं है. पिछले कुछ सालों में बीजेपी और तृणमूल के बीच नेताओं का आना-जाना लगातार देखा गया है. हालांकि अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और माकपा के नेता भी इस प्रवृत्ति का हिस्सा बनेंगे या अपने-अपने राजनीतिक रास्ते पर डटे रहेंगे. आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि बीजेपी का “एक छाते के नीचे” का नारा कितना असर दिखाता है और 2026 की चुनावी जंग किस दिशा में जाती है.


