West Bengal News: चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों की सख्ती को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग हमेशा से ही जाना जाता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के काटोआ इलाके में एक ऐसी घटना घटी है, जो अभूतपूर्व है. यहां एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने खुद को और अपनी पत्नी को SIR की सुनवाई का नोटिस थमाया. इस घटना ने इलाके में खासी चर्चा बटोरी है, जहां BLO देबशंकर चट्टोपाध्याय को खुद अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी.
नियम सबसे लिए एक- नोटिस पर बीएलओ
BLO होने पर भी चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक ऐप में नोटिस आया है. इसलिए सुनवाई में स्वयं खुद और पत्नी को लेकर उपस्थित रहना होगा और पांच लोगों की तरह उन्हें भी सुनवाई की लाइन में खड़ा होना होगा. इस संदर्भ में काटोआ के उप-मंडल शासक अनिर्बान बसु मौखिक रूप से बताते हैं, “BLO होने पर भी चुनाव आयोग के नियम का पालन करना होगा. अपने परिवार के मामले में भी वही नियम.”
क्यों जारी किया सुनवाई का नोटिस?
पता चला है कि केतुग्राम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत भोमरकोल अवैतनिक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक देबशंकर चट्टोपाध्याय मूल रूप से उसी इलाके के कोरोला गांव के निवासी हैं. वह वहां के 165 नंबर बूथ के BLO हैं. वर्तमान में वह काटोआ शहर के 10 नंबर वार्ड के चौरांगी इलाके में पत्नी अनिंदिता चट्टोपाध्याय और अपने एक बेटे के साथ रहते हैं. देबशंकर बाबू को और उनकी पत्नी दोनों को SIR की सुनवाई का नोटिस आया है. BLO देबशंकर बाबू के पिता का नाम पुलकेंद्र चट्टोपाध्याय है, लेकिन लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में उपनाम की वर्तनी गलत है. इसी कारण उन्हें चुनाव आयोग ने सुनवाई का नोटिस भेजा है.
दूसरी ओर पत्नी अनिंदिता चट्टोपाध्याय का मायका नदिया जिले के नकाशिपाड़ा में है. उनके पिता का नाम अनिल चट्टोपाध्याय है. लेकिन लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के लिए उनकी और पिता की उम्र में 50 साल का अंतर है. इसलिए BLO पति ने खुद और पत्नी को सुनवाई का नोटिस पकड़ाया.
देबशंकर बाबू का कहना है, “चुनाव आयोग के नियम का पालन करने के लिए बाध्य हैं. यहां अलग से मेरे अपने परिवार का कोई महत्व नहीं है. सब बराबर हैं.” उनकी पत्नी अनिंदिता चट्टोपाध्याय कहती हैं, “यह तो मेरे पति का काम है. उन्हें तो काम करना होगा.”


