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तेलंगाना के कई जिलों में यूरिया संकट; बच्चों के साथ कतार में महिलाएं, किसानों पर पुलिस ने बरसाई
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तेलंगाना के कई जिलों में यूरिया संकट; बच्चों के साथ कतार में महिलाएं, किसानों पर पुलिस ने बरसाई

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तेलंगाना में किसान यूरिया की आपूर्ति की कमी से जूझ रहे हैं और अपनी हताशा के बाद हिंसक हो गए हैं. किसानों ने यूरिया गोदामों और उर्वरक की दुकानों पर पथराव और आगजनी शुरू कर दी है. वे बारिश और धूप में कतार में लगने के लिए मजबूर हैं, उनमें से ज्यादातर रात से कतार में खड़े हैं लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी उन्हें यूरिया का एक बैग नहीं मिला है.

सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रहे हैं, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप का खेल किसानों के लिए फायदेमंद नहीं है. किसान परिणाम चाहते हैं, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार एक-दूसरे पर निशाना साधने के बजाय उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर रही हैं.

तेलंगाना के यदाद्री, सूर्यपेट और महबूबाबाद जिलों में यूरिया की भारी कमी ने किसानों के बीच हाहाकार मचा दिया है. यूरिया के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े किसानों की त्रासदी और पुलिस कार्रवाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. इस बीच, यूरिया केंद्रों पर मारपीट और बेहोशी के मामले सामने आए हैं, जो इस संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं.

यूरिया लेने के लिए अपने बच्चों के साथ कतार में खड़ी माताएं

राज्य के यदाद्री जिले के अड्डागुदुर में एक हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला, जहां एक मां अपने भूखे बच्चे को खाना खिलाते हुए यूरिया की कतार में खड़ी थी. वहीं, एक अन्य मां अपने तीन बच्चों के साथ घंटों इंतजार करती रही. यह दृश्य केवल यूरिया की कमी का नहीं, बल्कि किसानों की मजबूरी और बेबसी का भी प्रतीक है.

एक किसान ने सीएम रेवंत रेड्डी से की बहस, घर पहुंची पुलिस

वहीं, राजन्ना सिरिसिला जिले के एल्लारेड्डीपेट मंडल केंद्र में किसान लक्ष्मण यादव ने यूरिया की कमी को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से बहस की थी. इस साहसिक कदम का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा. एक पुलिस अधिकारी ने उनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज की और पुलिस उनके घर पहुंचकर उन्हें थाने बुलाने लगी. लक्ष्मण के समर्थन में उनके साथी किसान भी थाने पहुंचे और एकजुटता दिखाई. यह घटना सरकार और किसानों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है.

दो महिलाओं के बीच झड़प, बाल पकड़कर चप्पलों से की मारपीट

सूर्यपेट जिले के हुजूरनगर मंडल केंद्र में सुबह से यूरिया की कतार में खड़ी एक महिला किसान अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी. घंटों की थकान और भूख ने उनकी हालत बिगाड़ दी. दूसरी ओर, महबूबाबाद जिला केंद्र के अग्रोस रायथु सेवा केंद्र में आधार कार्ड पंजीकरण को लेकर दो महिलाओं के बीच झड़प हो गई. यह झड़प इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक-दूसरे के बाल पकड़कर मुख्य सड़क पर चप्पलों से मारपीट शुरू कर दी. यह घटना यूरिया संकट के कारण बढ़ती हताशा को दर्शाती है.

यूरिया के कम आवंटन से भड़के किसान

सूर्यपेट जिले के कोडाद मंडल के गुडीबांडा गांव में किसानों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, जब सात गांवों के लिए केवल 277 बैग यूरिया आवंटित किए गए. रातभर इंतजार करने के बाद भी किसानों को निराशा हाथ लगी. उन्होंने यूरिया केंद्र पर प्रदर्शन करते हुए सवाल उठाया कि इतने कम बैग 7 गांवों की जरूरत कैसे पूरी कर सकते हैं?

यूरिया का बैग मिलने पर किसान ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल

वारंगल जिले के नल्लाबेल्ली मंडल के बुचिरेड्डी पल्ली में किसानों की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उन्हें यूरिया के ऐसे बैग दिए गए, जिनमें गांठें और पाउडर थे. एक किसान ने शिकायत की कि वह पूरे दिन लाइन में खड़ा रहा, लेकिन मिला यूरिया खेती के लिए उपयोगी नहीं है. यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार बन गई है.

यूरिया की कमी, खराब गुणवत्ता और पुलिस कार्रवाई ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है. सवाल उठता है कि आखिर कब तक किसान इस तरह की उपेक्षा और त्रासदी झेलते रहेंगे? क्या सरकार इस संकट का समाधान कर पाएगी या किसानों की यह पुकार अनसुनी रह जाएगी?

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