DS NEWS | The News Times India | Breaking News
‘रमजान में उर्दू स्कूलों के समय में होगा बदलाव’, कर्नाटक सरकार का फैसला
India

‘रमजान में उर्दू स्कूलों के समय में होगा बदलाव’, कर्नाटक सरकार का फैसला

Advertisements


कर्नाटक सरकार ने रमजान के महीने के राज्य के उर्दू स्कूलों के समय में बदलाव करने का फैसला किया है. ये बदलाव उर्दू माध्यम के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में किए जाएंगे. कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार (2 फरवरी, 2026) को कहा कि सरकार के इस कदम को अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण कहना सही नहीं है.

सरकार ने एक परिपत्र जारी कर कहा है कि यह निर्णय सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के स्कूलों पर लागू होगा और यह फैसला मौजूदा आदेशों की समीक्षा और कर्नाटक राज्य प्राथमिक विद्यालय शिक्षा संघ (आर), बेंगलुरु की ओर से प्रस्तुत एक अभ्यावेदन के बाद लिया गया है.

सोमवार को सार्वजनिक हुए 30 जनवरी के परिपत्र में कहा गया है ‘इससे पहले, 31 अक्टूबर, 2002 को जारी एक स्थाई आदेश के माध्यम से, राज्य में उर्दू माध्यम के निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों को सिर्फ सुबह आठ बजे से दोपहर 12.45 बजे तक कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी गई थी, और उक्त स्थाई आदेश के नियमों के अनुसार समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.’

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने आठ मार्च, 2023 के अपने उस आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत राज्य पाठ्यक्रम का पालन करने वाले स्कूलों के लिए शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए एक गतिविधि कार्य योजना लागू की गई थी. उस परिपत्र के अनुसार, दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों के लिए विद्यालय के नियमित घंटे सुबह 10 बजे से शाम 4.20 बजे तक निर्धारित किए गए थे. हालांकि, रमजान और उर्दू माध्यम संस्थानों के लिए लंबे समय से चले आ रहे विशेष प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने एसोसिएशन के अध्यक्ष की ओर से 17 जनवरी, 2026 को प्रस्तुत एक अभ्यावेदन के बाद मामले की नए सिरे से समीक्षा की.

आदेश में कहा गया है, ‘शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में, राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के समय में परिवर्तन रमजान के महीने के प्रारंभ की तिथि से 20 मार्च, 2026 तक लागू होगा.’ इस कदम को उचित ठहराते हुए परमेश्वर ने कहा कि इनका उद्देश्य उर्दू माध्यम के बच्चों को अन्य बच्चों के बराबर लाना है.

उन्होंने कहा, ‘अगर कोई अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की तरह हर मायने में आपके बराबर नहीं है, तो आपको क्या लगता है कि संविधान में शुरू से ही अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण क्यों दिया गया था? आपको क्या लगता है कि संविधान में पिछड़े वर्गों का ज़िक्र क्यों किया गया है? ये वो लोग हैं जिन्हें हजारों सालों से उपेक्षित किया गया है. क्या आप नहीं चाहते कि ये लोग दूसरों के बराबर हों और एक समतावादी समाज का निर्माण करें?’

जी. परमेश्वर ने कहा कि समय में किया गया बदलाव कार्यक्रमों के संदर्भ में सरकार की ओर से दिया गया थोड़ा सा प्रोत्साहन है. उन्होंने कहा, ‘अगर इसे बर्दाश्त नहीं किया जाता है, तो इसका मतलब है कि आप लोगों के साथ समान व्यवहार किए जाने के खिलाफ हैं.’



Source link

Related posts

एक गलती मतलब सीधे मौत, जब हथियार तस्करों के बीच घुस गया भारतीय एजेंट, जानें क्या था Op लीच

DS NEWS

‘Jio के नेटवर्क में नहीं आई थी कोई समस्या’, अफवाहों के बीच टेलीकॉम कंपनी ने जारी किया बयान

DS NEWS

डेयरी बिज़नेस में निवेश का झांसा देकर 10 करोड़ की ठगी, ED की छापेमारी शुरू

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy