सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में कुलदीप सेंगर की अपील पर तेजी से सुनवाई का आदेश दिया है. सेंगर ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने इस पर सुनवाई से मना किया है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि वह सजा के खिलाफ सेंगर की अपील पर 3 महीने में सुनवाई पूरी करे
साल 2018 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी. पूर्व विधायक सेंगर को इस मामले में धारा 304 (गैरइरादतन हत्या) के तहत 10 साल की सजा मिली है. 19 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर की सजा स्थगित करने से मना कर दिया था. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सेंगर ने दलील दी थी कि वह 7 साल 7 महीना जेल में बिता चुका है इसलिए, अपील लंबित रहने के दौरान उसे जमानत दी जाए
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा स्थगित करने पर सुनवाई से मना किया. सेंगर के लिए पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि इस तरह तो अपील के लंबित रहते ही उनका मुवक्किल 10 साल की सज़ा काट लेगा. अगर इसके बाद हाई कोर्ट ने उसे निर्दोष पाया तो यह अन्याय होगा. इस पर कोर्ट ने हाई कोर्ट को 3 महीने में सेंगर की अपील के निपटारे के लिए कहा.
सुनवाई के दौरान बेंच के सदस्य जस्टिस जोयमाल्या बागची ने पूछा कि इस मामले में धारा 302 के तहत केस क्यों नहीं चला? पीड़िता के वकील ने कहा कि उन्होंने यह मांग करते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट 1 सप्ताह में पीड़िता की याचिका के खिलाफ सेंगर की आपत्तियों को सुने. अगर याचिका सुनवाई योग्य लगती है तो उसे भी मुख्य मामले के साथ सुना जाए.
मामले को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसके मीडिया ट्रायल पर नाराजगी जताई. बेंच ने पीड़िता के वकील महमूद प्राचा को कोर्ट के बाहर दिए उनके बयानों के लिए कड़ी फटकार लगाई. चीफ जस्टिस ने कहा, ‘आपका लाइसेंस सस्पेंड होने से मैंने एक बार बचाया था. आप इस बात को समझें कि हमारी नजर आप पर है. प्रोफेशनल गरिमा को बनाए रखिए.’
पीड़िता के पिता की मौत मामले में 10 साल की सजा के अलावा सेंगर को नाबालिग पीड़िता से बलात्कार के लिए भी उम्रकैद की सजा मिली है. उस मामले में हाई कोर्ट के उसकी सजा निलंबित की थी, लेकिन 29 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी.


