DS NEWS | The News Times India | Breaking News
ट्रंप के टैरिफ और EU ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बजट में क्या है? इन सवालों के नहीं मिले जवाब
India

ट्रंप के टैरिफ और EU ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बजट में क्या है? इन सवालों के नहीं मिले जवाब

Advertisements


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी 2026) को पेश बजट में कुछ सेक्टर्स को भरपूर पैसा दिया है. बात चाहे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की हो या फिर भारत में डाटा सेंटर बनाने के लिए क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने की, एआई टूल की हो या फिर 7 नए स्पीड रेल कॉरिडोर की, एमएसएमई के लिए फंड हो या फिर बायोफार्मा शक्ति मिशन और कंटेंट क्रिएटर्स लैब्स की, इन सेक्टर्स को वित्त मंत्री ने खूब पैसा दिया, लेकिन क्या बजट के ये ऐलान काफी हैं?

क्या जब भारत समेत पूरी दुनिया डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के बोझ तले दबी हुई है और यूरोपियन यूनियन से मदर ऑफ ऑल डील्स के बाद विदेश से भारत आने वाला सामान सस्ता होने वाला है तो ऐसे में यहां के उद्योग-धंधों के लिए बजट में वो प्रावधान हैं, जिनसे भारत की उत्पादकता पर सकारात्मक असर होगा. आखिर जिस बजट को सरकार विकसित भारत के लक्ष्य के तौर पर पेश कर रही है, क्या उसमें ऐसा कुछ है कि 2047 से पहले 2027 में भी किसी के लिए कुछ बेहतर हो सकता है? 

भारत के सामने क्या हैं अंतरराष्ट्रीय चुनौतियां?

भारत के सामने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो चुनौतियां हैं. पहली चुनौती है विदेश को सामान बेचना और ऐसा सामान बेचना जो ड्यूटी फ्री हो. दूसरा विदेश से वो सामान सस्ते दर पर और ड्यूटी फ्री खरीदना जो भारत में मौजूद न हो. अब भारत अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगा रखा है. ऐसे में भारत अमेरिका को जो इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन बेचता है, रत्न और आभूषण बेचता है, दवाएं बेचता है, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इंजन, औद्योगिक उपकरण और लोहे, स्टील से बनी चीजें बेचता है, उनके उत्पादकों को हो रहे नुकसान के बारे में इस बजट में कोई जिक्र नहीं है.

बजट में टैरिफ का नुकसान झेलने वालों का जिक्र नहीं

भारतीय झींगा और भारत की दूसरी समुद्री मछलियां भी अमेरिका को बेची जाती हैं, लेकिन बढ़े हुए टैरिफ के बाद इनके उत्पादकों को हो रहे नुकसान पर बजट में कोई खास प्रावधान अलग से नहीं किया गया है. हां अमेरिका भारतीय कपड़ों, रेडीमेड गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल जैसे चादरें, तौलिए और कालीन का बहुत बड़ा खरीदार रहा है और बढ़े हुए टैरिफ के बाद टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं तो यहां पर टेक्सटाइल में थोड़ी राहत दिख रही है.

बड़ा सवाल उन लोगों को लेकर है, जो यूरोपियन यूनियन के साथ हुई मदर ऑफ ऑल डील्स से सीधे तौर पर प्रभावित हैं. उदाहरण के तौर पर

1. डेयरी प्रोडक्ट- भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, फिर भी नीदरलैंड और फ्रांस से भारत में हाई-क्वालिटी चीज और पाउडर वाला दूध आता है. डील के बाद ये सामान और सस्ता होगा, क्योंकि सब ड्यूटी फ्री होगा तो भारत के किसान इससे सीधे प्रभावित होंगे.

2. भारत में सेब और नाशपाती की खेती होती है, लेकिन हम बेल्जियम और इटली से भी सेब-नाशपाती खरीदते हैं. पहले टैक्स लगता था तो विदेश ये महंगे आते थे और कुछ खास लोग ही इन्हें खरीद पाते थे. ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की वजह से जब विदेशी फल सस्ते होंगे तो भारत के फल उत्पादकों पर भी असर पड़ेगा.

3.  भारत में सरसों और मूंगफली का उत्पादन होता है, जिससे खाने वाला तेल मिलता है. ऑलिव ऑयल कुछ ही लोग खरीद पाते हैं, जो यूरोप से आता है क्योंकि वो महंगा होता है. फ्री ट्रेड डील से वो सस्ता हो जाएगा तो सरसो उत्पादकों और मूंगफली उत्पादकों पर इसका नकारात्मक असर होगा, जिससे निपटने के लिए इस बजट में कोई प्रावधान नहीं है.

4. भारत भी शराब बनाता है. नासिक में बनती है, लेकिन फ्रांस और इटली की जो शराब ड्यूटी फ्री भारत में आएगी तो भारत की शराब कंपनियों पर भी असर पड़ेगा, जिससे बचने का रास्ता इस बजट में कुछ भी नहीं बताया गया है.

5. भारत में भी चॉकलेट बनती है. विदेश से भी खास तौर से बेल्जियम और जर्मनी से चॉकलेट्स आती है. ट्रेड डील के बाद विदेशी चाकलेट सस्ती होंगी तो भारतीय चॉकलेट कंपनियों का क्या होगा, ये बजट नहीं बता रहा है.

6. हेवी मशीनरी, केमिकल, प्लास्टिक, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, लोहा और स्टील भारत में भी बनता है. और बड़े पैमान फ्री ट्रेड डील के बाद इन्हें बाहर से भी सस्ते दाम पर खरीदा जाएगा तो भारतीय कंपनियों का क्या होगा, बजट में इसकी कोई बात ही नहीं है.

7. जेम्स और ज्वेलरी का भी यही हाल है. भारत हीरा तराशने का केंद्र है, लेकिन कच्चे हीरे और कुछ कीमती पत्थर बेल्जियम से आते हैं. अगर ये और भी सस्ते दाम पर भारत में आने लगे तो भारतीय हीरा कारोबारियों का क्या होगा? सरकार इस बजट में ये नहीं बता पाई है.



Source link

Related posts

गंगोत्री ग्लेशियर 10 फीसदी पिघला! क्या आ रही बड़ी आफत? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

DS NEWS

अमेरिका का टैरिफ फुस्स! भारत ने 5 महीने में रूसी तेल खरीद का बनाया रिकॉर्ड, रिपोर्ट देख जलभुन ज

DS NEWS

लद्दाख में फिर शुरू होगा आंदोलन! KDA ने न्यायिक जांच की मांग दोहराई, मौन मार्च और ब्लैकआउट

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy