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डॉक्टर ने मरीज को घर जाकर देखने से किया इनकार, TMC नेता पर घसीट-घसीटकर पीटने का आरोप
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डॉक्टर ने मरीज को घर जाकर देखने से किया इनकार, TMC नेता पर घसीट-घसीटकर पीटने का आरोप

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West Bengal: तृणमूल के कर्णगढ़ अंचल के अध्यक्ष कंचन चक्रवर्ती पर रोगी को देखने घर जाने से इनकार करने पर पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी में एक डॉक्टर की पिटाई का आरोप लगा है. इस संबंध में थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. आरोपी तृणमूल नेता ने दावा किया है कि यह शिकायत राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है. दूसरी ओर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर बीजेपी ने कटाक्ष किया है. 

चैंबर के अंदर ही बेरहमी से पिटाई! कॉलर पकड़कर घसीटकर रोगी के घर ले जाने का आरोप. बाद में मृत रोगी के शव को डॉक्टर के घर के सामने रखकर विरोध प्रदर्शन. तृणमूल नेता के बीमार रिश्तेदार को देखने न जाने पर इस तरह एक डॉक्टर को सजा देने का आरोप तृणमूल के अंचल अध्यक्ष पर लगा है. पीड़ित डॉक्टर निखिलरंजन घोष ने कहा, “नशे की हालत में आकर उसने मेरा कॉलर पकड़ा और पीटा और घसीटा.”

 तृणमूल नेता पर नशे में होने का आरोप

यह घटना पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी ब्लॉक के भादुतला इलाके में हुई. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, तृणमूल के कर्णगढ़ अंचल के अध्यक्ष कांचन चक्रवर्ती का एक रिश्तेदार बीमार था. स्थानीय होम्योपैथी डॉक्टर निखिलरंजन घोष को सोमवार सुबह बुलाने के लिए तृणमूल नेता का एक रिश्तेदार उनके चैंबर में गया. डॉक्टर का दावा है कि बीमारी के कारण घर जाने से इनकार करने पर तृणमूल नेता नशे की हालत में वहां पहुंचे. मारपीट करने के साथ-साथ उन्हें घसीटा गया. 

डॉक्टर बनाम नेता: आरोप-प्रतिआरोप विवाद

घटना के संबंध में निखिलरंजन घोष ने कहा, मैंने उससे कहा, आप जानते हैं, कोविड के बाद से मैं चैंबर से बाहर नहीं निकला हूं. मेरी तबीयत भी बहुत खराब है. मैंने बाहर रोगियों को देखना बिल्कुल बंद कर दिया है. वहां के तृणमूल नेता कांचन चक्रवर्ती नशे की हालत में आए और मेरा कॉलर पकड़कर पीटा.

आरोपी तृणमूल नेता का दावा है कि डॉक्टर का दावा निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित है. कांचन चक्रवर्ती ने कहा, कोई मारपीट नहीं हुई. हम उन्हें चार बार बुलाने गए, वह नहीं आए. फिर मैं गया. मैंने कोई थप्पड़ नहीं मारा. वह मेरे पिता के दोस्त थे. क्या मैं उन्हें मार सकता हूं? बिल्कुल झूठ. वह तो बीजेपी करते हैं.

डॉक्टर घर के सामने शव रखकर विरोध

डॉक्टर का दावा है कि उन्होंने जाकर देखा कि रोगी की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी. इसके बावजूद, उनके घर के सामने शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया गया. घटना के कारण रात में अस्वस्थ महसूस करने पर डॉक्टर को मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है.



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