केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पत्रों और दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय को लौटाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज देश की संपत्ति हैं, किसी व्यक्ति विशेष की नहीं.
20 सालों से नेहरू से संबंधित दस्तावेज संग्रालय में रखे गए
संस्कृति मंत्री ने कहा कि 1970 से 1990 तक 20 सालों की अवधि में नेहरू से संबंधित सभी गैर-सरकारी दस्तावेज संग्रहालय में लाए गए. इनमें नेहरू द्वारा लोगों को लिखे गए निजी पत्र, उनके उत्तर और उनकी निजी टिप्पणियां हैं. शेखावत ने कहा, ‘सभी प्रधानमंत्रियों के ऐसे ही दस्तावेज प्रधानमंत्री संग्रहालय में संरक्षित हैं. ऐसे लगभग 2.5 करोड़ दस्तावेज हैं. इनमें से अकेले पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित चार लाख दस्तावेज हैं.’
उन्होंने कहा कि अन्य प्रधानमंत्रियों के दस्तावेज प्रधानमंत्री संग्रहालय की स्थायी संपत्ति और विरासत हैं जबकि यह लिखा गया है कि नेहरू के दस्तावेज संग्रहालय को ऋण या उपहार के रूप में नहीं दिए गए थे बल्कि सुरक्षित रखने के लिए दिए गए थे.
26 हजार दस्तावेजों से भरे 57 बॉक्स संग्रहालय से ले जाए गए
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 29 अप्रैल 2008 को सोनिया गांधी के निर्देश पर उनके प्रतिनिधि एम.वी. राजन ने एक पत्र लिखकर नेहरू के सभी निजी पारिवारिक पत्रों और नोट्स को वापस लेने का अनुरोध किया था. इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि चूंकि ये पत्र संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए थे इसलिए परिवार द्वारा मांगे गए पत्र उन्हें लौटा दिए जाएं.
इसी क्रम में लगभग 26,000 दस्तावेजों से भरे लगभग 57 बॉक्स संग्रहालय से ले जाए गए. शेखावत ने कहा, ‘हमने इन्हें लौटाने का अनुरोध किया है. सोनिया गांधी ने कहा है कि वह इस मामले पर गौर करेंगी. क्योंकि स्वाभाविक रूप से ये मंत्री पद से संबंधित दस्तावेज किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं हो सकते. हमने उन्हें दो पत्र लिखे हैं, हम एक बार फिर उनसे इन्हें लौटाने का आग्रह करते हैं.’
नेहरू के निधन के बाद बनाया गया था संग्रहालय
मंत्री ने नेहरू के पत्रों और दस्तावेजों के बारे में कहा, ‘नेहरू मेमोरियल संग्रहालय एवं पुस्तकालय की स्थापना प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद हुई थी. इसका नाम 2023 में बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय कर दिया गया था. संग्रहालय के प्रबंधन के लिए एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन वह ठीक से कार्य नहीं कर पाई.’


