तेलंगाना के वारंगल में स्थित काकतीय विश्वविद्यालय (Kakatiya University) के छात्रावास में रविवार (22 फरवरी 2026) की दोपहर को एक मामूली विवाद ने इतना तूफान खड़ा कर दिया कि हालात हिंसक झड़प तक पहुंच गए. यह घटना न सिर्फ विश्वविद्यालय के अनुशासन को लेकर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी-सी बात कैसे बड़े विवाद का रूप ले सकती है. पुलिस और प्रशासन के सामने जो सच्चाई सामने आई है, वह काफी हद तक शर्मनाक है. घटना कल यानी रविवार की दोपहर लगभग 1 बजे की है, लेकिन इसकी जानकारी देर से सामने आई.
जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला छात्रावास के मेस में लंच के दौरान परोसे गए बचे हुए चिकन (Leftover Chicken) को लेकर शुरू हुआ. एमबीए (MBA) फर्स्ट ईयर और इकोनॉमिक्स (Economics) फर्स्ट ईयर के छात्रों के बीच भोजन के समय इस चिकन को आपस में बांटने को लेकर बहस छिड़ गई. शुरुआत में यह बहस सिर्फ तकरार भर थी, लेकिन तुरंत बाद यह आपसी गाली-गलौच में बदल गई. स्थिति तब और बिगड़ गई जब दोनों पक्षों के छात्रों ने हाथ-पैर चलाना शुरू कर दिए. गवाहों के अनुसार, विवाद इतना गहरा गया कि छात्रों ने आस-पास रखी लाठियां और सिक्के उठा लिए और एक-दूसरे पर हमला कर दिया. इस हिंसक टकराव में कुछ छात्रों के हाथ-पैर टूटे होने की भी खबरें हैं, हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.
एमबीए और इकोनॉमिक्स छात्रों के बीच नाराजगी
इस घटना का एक अहम पहलू यह भी है कि यह झड़प अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी जड़ें पहले से मौजूद तनाव में थीं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमबीए और इकोनॉमिक्स छात्रों के बीच पहले से ही कुछ बातों को लेकर नाराजगी चल रही थी, जो चिकन बांटने के मुद्दे पर पूरी तरह से उबल पड़ी. काकतीय विश्वविद्यालय के छात्रावास में अक्सर विभागीय छात्रों के बीच दबाव बना रहता है और यह घटना उसी गहरे दरार को दर्शाती है. मौके पर मौजूद अन्य छात्रों और मेस स्टाफ ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और माहौल पूरी तरह से खराब हो चुका था.
काकतीय विश्वविद्यालय मामले में पुलिस की कार्रवाई
इस हिंसा के बाद पुलिस ने तत्काल कदम उठाते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि अभी कोई औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस दोनों पक्षों के छात्रों से पूछताछ कर रही है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी संज्ञान लेते हुए छात्रावास में अनुशासन को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. यह घटना उन सवालों को जन्म देती है कि आखिर छात्रावास का प्रबंधन इतना ढीला क्यों हो गया था कि एक भोजन को लेकर लाठियां चलने तक का मामला बन गया.


