तेलंगाना के मक्तल तहसीलदार कार्यालय में सोमवार (26 जनवरी, 2026) को गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री वाकिटि श्रीहरि बाल-बाल बच गए. जब मंत्री राष्ट्रीय ध्वज को फहरा रहे थे, तब अचानक झंडे का खंभा टूटकर नीचे गिर गया. इस दुर्घटना में मौके पर मौजूद कई लोगों को चोटें आई हैं, लेकिन मंत्री सुरक्षित हैं. यह घटना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, खासकर तब जब इससे पहले बीआरएस नेता कोथा प्रभाकर की ओर से उल्टा झंडा फहराने की घटना सामने आ चुकी है.
घटना सोमवार (26 जनवरी, 2026) सुबह करीब 9 बजे की है, जब मंत्री वाकिटि श्रीहरि मक्तल में आयोजित आधिकारिक समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. राष्ट्रगान के बाद जैसे ही मंत्री ने रस्सी खींची, तिरंगे को ऊपर उठाने के बजाय लोहे का पोल ही टूटकर नीचे आ गिरा. झंडे के साथ भारी स्टील पोल गिरने से वहां अफरा-तफरी मच गई. मंत्री के समीप खड़े कुछ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर पोल गिरा, जिससे उन्हें चोटें आईं. सौभाग्य से मंत्री उस समय थोड़ा सा आगे खड़े थे, जिससे वे इस हादसे से बच गए.
यह घटना तेलंगाना में आयोजित आधिकारिक समारोहों में बढ़ती अव्यवस्थाओं की ओर भी इशारा करती है. इससे ठीक पहले, एक अन्य घटना में बीआरएस नेता कोठा प्रभाकर ने गलती से उल्टा झंडा फहरा दिया था, जिसे लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था. अब इस हादसे ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी राष्ट्रीय समारोहों की गंभीरता को समझ पा रहे हैं?
भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर अपनी सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलें, युद्धक विमान, नवगठित इकाइयां और घातक हथियार प्रणाली शामिल थीं. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे. कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ है.
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