तेलंगाना की राजनीति में अपने आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद धर्मपुरी अरविंद एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं. सोमवार (16 फरवरी, 2026) की दोपहर, जब निजामाबाद नगर निगम में मेयर पद के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही थी, तब एक्स-ऑफिसियो सदस्य के तौर पर मतदान करने पहुंचे सांसद अरविंद की ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक हुई.
यह विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया, जब सांसद ने एक पुलिस अधिकारी को सरेआम ‘बेवकूफ’ कह दिया और उन्हें मामले में दखल न देने की चेतावनी दे डाली. चश्मदीदों के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब पुलिस चुनावी केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल का पालन कराने की कोशिश कर रही थी.
पुलिसकर्मी से क्या बोले भाजपा सांसद?
घटना के दौरान सांसद धर्मपुरी अरविंद के तेवर काफी तल्ख नजर आए. उन्होंने बीच-बचाव करने की कोशिश कर रहे एक पुलिसकर्मी को डांटते हुए कहा, ‘बेवकूफ आदमी.. अपना मुंह बंद रखो. मैं ऑफिसर से बात कर रहा हूं, तुमसे नहीं. मामले में दखल मत दो.’ चुनावी केंद्र पर मौजूद अन्य अधिकारियों और मीडिया कर्मियों के सामने हुई इस घटना ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है.
सांसद का व्यवहार सोशल मीडिया पर चर्चा का बना विषय
पुलिस के प्रति सांसद का यह व्यवहार सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब अरविंद का पुलिस के साथ इस तरह का टकराव सामने आया है. इससे पहले पिछले हफ्ते बुधवार (11 फरवरी, 2026) को हुए म्युनिसिपल चुनाव के दौरान भी उन पर इसी तरह के आरोप लगे थे.
किन-किन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पिछले हफ्ते की घटना पर निजामाबाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सांसद के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. निजामाबाद के आई टाउन पुलिस स्टेशन में उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 132, 223 और 296(b) के तहत क्राइम नंबर 51/26 दर्ज किया गया है. इसके अलावा, उन पर तेलंगाना म्युनिसिपैलिटीज एक्ट, 2019 की धारा 226 के उल्लंघन का भी मामला दर्ज किया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात लोक सेवकों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार कानूनन अपराध है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है.
विवादों और पुलिस से टकरावों से भरा है धर्मपुरी का राजनीतिक सफर
धर्मपुरी अरविंद का राजनीतिक सफर विवादों और पुलिस के साथ टकरावों से भरा रहा है. पिछले कुछ सालों में उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी और पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के कई मामले सामने आए हैं. पिछले हफ्ते बुधवार (11 फरवरी, 2026) की घटना के बाद यह दूसरी बार है, जब महज एक हफ्ते के भीतर उन पर पुलिस के साथ बदसलूकी का केस दर्ज हुआ है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से चुनाव का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा आती है. फिलहाल, शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है और मेयर चुनाव की प्रक्रिया कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न कराई जा रही है.


