मुस्लिम पुरुषों को तलाक का एकतरफा हक देने वाली व्यवस्था तलाक ए हसन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज सख्त रवैया दिखाया. नोटिस के बावजूद पेश न होने वाले एक व्यक्ति की तरफ से दिए गए तलाक को कोर्ट ने अमान्य करार दिया. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उसका आदेश सिर्फ इसी मामले के लिए है. तलाक की व्यवस्था की वैधता को लेकर उठाए गए सवालों पर वह बाद में विस्तार से सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने दिखाई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को अमान्य करार देने का आदेश आसमा नाम की याचिकाकर्ता की याचिका पर दिया है. साल 2022 से लंबित इस याचिका पर कोर्ट के नोटिस के बावजूद अब तक आसमा के पति मोहम्मद अंशार या उनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा है कि जब तक प्रतिवादी पेश होकर याचिकाकर्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों पर सफाई नहीं देता तब तक याचिकाकर्ता और प्रतिवादी को पति-पत्नी माना जाएगा.
मुख्य याचिकाकर्ता को भी दी राहत
बुधवार, 11 फरवरी को ही सुनवाई में कोर्ट ने मामले की मुख्य याचिकाकर्ता बेनजीर हिना को भी राहत दी. कोर्ट ने कहा कि बेनजीर को उनके पति यूसुफ की तरफ से दोबारा दिए गए तीनों तलाक भी अभी लागू नहीं होंगे. मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ मध्यस्थता करेंगे और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे. कोर्ट ने इसके लिए 1 महीने का समय दिया है.
क्या है मामला?
गाजियाबाद की रहने वाली बेनजीर हिना को उनके पति यूसुफ ने 2022 में तलाक ए हसन (1-1 महीने के अंतर में कुल 3 बार बोला जाने वाला तलाक) दिया, लेकिन यूसुफ ने ऐसा एक वकील के जरिए किया. यानी वकील के दस्तखत से बेनजीर को 3 बार तलाक भेजा गया. बेनजीर ने इसे अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. साथ ही मुस्लिम पुरुषों को तलाक का एकतरफा हक देने वाली व्यवस्था को भी चुनौती दी.
दोबारा भेजे तलाक भी फिलहाल स्थगित
19 नवंबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पति की जगह किसी और की तरफ से तलाक देने पर सवाल उठाए थे. तब यूसुफ के लिए पेश वरिष्ठ वकील एम आर शमशाद ने माना कि यह गलत था. शमशाद ने इस गलती को सुधारने की मंशा जताई. इसके बाद युसूफ नेकी की तरफ से 3 बार डाक के जरिए बेनजीर को तलाक भेजा गया. लेकिन गलत पते के चलते यह बेनजीर तक नहीं पहुंचा. अब सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से दिए गए तलाक को भी स्थगित कर दिया है और दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए जस्टिस कुरियन जोसेफ के पास जाने के लिए कहा है.
बेनजीर ने क्या कहा है?
बेनजीर की तरफ से कोर्ट को बताया गया है कि तलाक की स्थिति साफ न होने के चलते उन्हें अपने 4 साल के बच्चे का स्कूल में दाखिला करवाने, पासपोर्ट बनवाने, बैंक अकाउंट खोलने जैसी हर बात में समस्या आ रही है. हर जगह उनकी वैवाहिक स्थिति और बच्चे के पिता की सहमति मांगी जाती है. यूसुफ ने कथित तलाक के बाद दूसरी शादी कर ली है. कभी अपने बच्चे के लिए कोई खर्चा तक नहीं दिया. 3 दिसंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्कूल, पासपोर्ट ऑथोरिटी, बैंक और UIDAI (आधार ऑथोरिटी) को आदेश दिया था कि वह बिना अड़चन बच्चे के दस्तावेज बनाएं.
दूसरी महिलाएं भी पहुंची हैं कोर्ट
कोर्ट में सिर्फ बेनजीर हिना का ही मामला नहीं है. नाजरीन निशा, सैयदा अंबरीन, नसरीन, साफिया, आसमा समेत कई मुस्लिम महिलाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं. सब ने खुद को एकतरफा मुस्लिम तलाक से पीड़ित बताया है. मुस्लिम महिलाओं को भी देश की बाकी महिलाओं जैसे संवैधानिक हक देने की मांग की है. कोर्ट ने कहा है कि वह मामले को विस्तार से सुन कर मुस्लिम तलाक पर फैसला देगा. अब इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 1 महीना बाद सुनवाई करेगा.


