विधायक टी. राजा सिंह ने अपने हालिया भाषण में हैदराबाद के पुराने शहर के कुछ नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता लगातार धार्मिक शोभा यात्राओं को रोकने के लिए षड्यंत्र रचते हैं और सत्ता के आगे झुककर अपनी राजनीति साधने का प्रयास करते हैं. सिंह के अनुसार ऐसे लोगों की वजह से सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं को नुकसान पहुंचता है.
भारत माता और वंदे मातरम को लेकर क्या कहा
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों और समुदायों को समान अधिकार प्राप्त है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं है, बल्कि वे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना चाहते हैं. सिंह ने कहा कि हर भारतीय को ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे नारों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि ये केवल शब्द नहीं बल्कि देश के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक हैं.
अब्दुल कलाम का किया जिक्र
टी राजा सिंह ने उन लोगों पर निशाना साधा जिन्हें इन नारों को बोलने में संकोच होता है. सिंह ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने भी देश के लिए लड़ते हुए ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए थे. उन्होंने उदाहरण के तौर पर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का नाम लिया, जिन्हें उन्होंने एक महान देशभक्त बताया और कहा कि उन्होंने कभी भी इन नारों को लेकर झिझक नहीं दिखाई.
विधानसभा का सुनाया किस्सा
विधानसभा की एक घटना का जिक्र करते हुए सिंह ने आरोप लगाया कि जब ‘वंदे मातरम’ बजाया गया, तब कुछ लोग वहां से बाहर चले गए. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार देश के प्रति असम्मान को दर्शाता है. अपने भाषण में उन्होंने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए चेतावनी भी दी कि राष्ट्रगान और राष्ट्रभक्ति से जुड़े प्रतीकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
अंत में, सिंह ने यह दावा किया कि आज देश का युवा वर्ग तेजी से राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर अग्रसर हो रहा है और भगवान राम के प्रति आस्था बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर काम करना होगा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा.
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