सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को एक अहम दखल देते हुए जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) के चल रहे चुनावों पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की एक सब-कमेटी के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी, आदेशों की बैक-डेटिंग और चुनावी लिस्ट में हेरफेर के आरोपों पर गंभीरता से ध्यान दिया.
ये चुनाव कोर्ट द्वारा नियुक्त चुनावी अधिकारी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ए.के. ज्योति की देखरेख में हो रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने तब दखल दिया जब याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सब-कमेटी ने मिलीभगत करके पिछली तारीखों में आदेश जारी किए और गैर-कानूनी तरीके से चुनावी लिस्ट में बदलाव किया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी को नुकसान पहुंचा.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अगर ये आरोप सच हैं, तो ये एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की बुनियाद पर ही चोट करते हैं. आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि अगर कोई चुनावी नतीजे आए हैं, तो उन्हें अगले आदेश तक घोषित नहीं किया जाएगा.
कोर्ट ने जोर दिया कि खेल निकायों, खासकर जो न्यायिक निगरानी में काम करते हैं, उनसे पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानून के शासन के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करने की उम्मीद की जाती है. बेंच ने संकेत दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने की कोई भी कोशिश कड़ी जांच के दायरे में आएगी.
याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा के नेतृत्व वाली कानूनी टीम ने किया, जिसमें एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सोएब कुरैशी, एडवोकेट शेख फराज, एडवोकेट चेतना अलग और एडवोकेट अमन कयूम वानी शामिल थे. उम्मीद है कि संबंधित पक्षों द्वारा जवाब दाखिल करने के बाद इस मामले की आगे सुनवाई होगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट विवादित कार्यों की वैधता और JKCA चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता की जांच करेगा.
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