सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (5 फरवरी, 2026) को एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अक्सर रिलेशनशिप में कड़वाहट आने के बाद या टूट जाने पर उन्हें आपराधिक रंग दे दिया जाता है. यह टिप्पणी कोर्ट ने उस मामले में की हैं, जिसमें एक शख्स पर रेप के आरोप लगे थे.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने रेप के आरोपों को लेकर शख्स के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि शख्स ने शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाए. कोर्ट ने कहा कि तथ्य साफ तौर पर बताते हैं कि यह आपसी सहमति से बने रिश्ते का मामला था जो बाद में कड़वाहट में तब्दील हो गया.
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए था और अपने निजी रिश्तों में कड़वाहट आने पर राज्य को शामिल करने से बचना चाहिए था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने कुछ पुराने फैसलों का हवाला दिया, जिसमें एक फैसला ऐसा भी था जिसमें इस परेशान करने वाली प्रवृत्ति पर ध्यान दिया गया था कि रिश्तों में कड़वाहट आने या टूट जाने पर रिश्ते को आपराधिक रंग दे दिया जाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मार्च के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें बिलासपुर जिले में फरवरी 2025 में दर्ज प्राथमिकी से शुरू हुई कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में शिकायत करने वाली और आरोपी दोनों वकील हैं और शिकायत करने वाली 33 साल की शादीशुदा महिला है और एक बच्चे की मां है.
बेंच ने कहा, ‘इस कोर्ट ने बार-बार यह व्यवस्था दी है कि सिर्फ इस बात से कि पक्षों ने शादी के वादे के बाद शारीरिक संबंध बनाए, हर मामले में इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा.’ बेंच ने कहा कि अदालतों को बलात्कार की धारा के प्रावधान के तहत दायर किए गए असली मामलों की पहचान करने में बहुत सावधान और सतर्क रहना होगा, और अपराध साबित करने वाले जरूरी तत्वों की पहचान करनी होगी.


