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बिहार के बाद अब दूसरे राज्यों में SIR का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचना शुरू
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बिहार के बाद अब दूसरे राज्यों में SIR का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचना शुरू

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तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग से 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. 26 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी. बिहार के बाद चुनाव आयोग अब 12 राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों में SIR शुरू कर चुका है. इसे लेकर राजनीतिक पार्टियों का सुप्रीम कोर्ट पहुंचना जारी है.

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर याचिकाएं
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने राज्य में SIR के विरोध में याचिका दाखिल की है. इसके अलावा भी तमिलनाडु में SIR के खिलाफ 5 याचिकाएं दाखिल हुई हैं. वहीं राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी एआईएडीएमके (अन्नाद्रमुक) ने SIR को सही बताते हुए इसके पक्ष में आवेदन दाखिल किया है. पश्चिम बंगाल में SIR के खिलाफ सत्ताधारी टीएमसी की सांसद डोला सेन और माला रॉय सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने भी याचिका दाखिल की है.

‘बारिश से लेकर क्रिसमस तक को बताया कारण’
डीएमके की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए. उन्होंने राज्य में बारिश, खेती का मौसम, क्रिसमस की छुट्टी, ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की कमी जैसे कई कारण SIR के विरोध में गिनाए. टीएमसी की तरफ से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी जिरह करने कोर्ट में मौजूद थे. बनर्जी ने कहा कि राज्य में अशिक्षित लोगों की बड़ी संख्या है. ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क कमज़ोर है.

‘अपने राज्य को पिछड़ा बताने की होड़’
चुनाव आयोग के लिए पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इन दलीलों पर चुटकी लेते हुए इसे SIR को टालने की कमज़ोर दलील बताया. द्विवेदी ने कहा, ‘राज्यों में आज कल खुद को पिछड़ा बताने की होड़ लग गई है.’ जस्टिस सूर्य कांत और जोयमाल्या बागची ने भी दोनों वरिष्ठ वकीलों (सिब्बल और बनर्जी) से कहा, ‘आप लोग इतने आशंकित क्यों हैं? यह एक विस्तृत प्रक्रिया है. इसमें कुछ दिक्कतें आएंगी ही. जो समस्याएं हैं, उन्हें चुनाव आयोग देख लेगा. आप ऐसी तस्वीर पेश कर रहे हैं जैसे देश में पहली बार वोटर लिस्ट संशोधन हो रहा है.’

बाकी राज्यों पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का भी संकेत दिया कि वह दूसरे राज्यों के SIR मामले को भी सुनेगा. जजों ने उन राज्यों के हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस मामले में दाखिल याचिकाओं की सुनवाई स्थगित रखें. कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग चाहे तो हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर करने के लिए आवेदन दाखिल कर सकता है.

नागरिकता और सर्चेबल वोटर लिस्ट पर दलील
याचिकाकर्ता एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को यह साफ करना चाहिए कि चुनाव आयोग किसी की नागरिकता तय नहीं कर सकता है.” भूषण ने यह भी कहा कि SIR की लिस्ट को मशीन रीडेबल फॉर्मेट (जिसमें कंप्यूटर के ज़रिए जानकारी ढूंढने की सुविधा हो) में वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए. इससे लोग यह देख सकेंगे कि उनका नाम लिस्ट में कहां है.

‘लॉगिन-पासवर्ड देने पर हो विचार’
भूषण की दलील पर कोर्ट ने कहा कि लिस्ट को मशीन रीडेबल फॉर्मेट में उपलब्ध करवाने से मतदाता की निजता का उल्लंघन हो सकता है. चुनाव आयोग को इस बारे में विचार करना चाहिए कि वह प्रत्येक मतदाता को निजी पासवर्ड उपलब्ध करा सके जिससे वह सिर्फ अपने नाम को लिस्ट में देख सकें. कोर्ट ने कहा कि वह 26 नवंबर को ADR के नए आवेदन पर भी सुनवाई करेगा. सुनवाई 27 नवंबर को भी जारी रहेगी. उस दिन SIR की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी.



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