तेजाब हमले के मामलों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कई तरह की जानकारी देने को कहा. इसमें ऐसे मामलों का वर्ष वार ब्यौरा, अदालतों में उनकी स्थिति के साथ साथ पीड़ितों की मदद के लिए किए गए पुनर्वास उपायों का विवरण भी शामिल है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे तेजाब हमले के उन मामलों की जानकारी दें जिनमें अधीनस्थ अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं. उन्हें उन मामलों की जानकारी भी देनी होगी जिनमें अधीनस्थ अदालत स्तर पर फैसला हो चुका है या जो लंबित हैं.
चार सप्ताह में विवरण देने का आदेश देते हुए पीठ ने उनसे ऐसे मामलों में हाईकोर्ट्स समेत अपीलीय अदालतों में दायर की गईं अपीलों की संख्या के बारे में भी जानकारी देने को कहा. बेंच ने उनसे हर पीड़ित की संक्षिप्त जानकारी, उसकी शैक्षणिक योग्यता, नौकरी और वैवाहिक स्थिति तथा चिकित्सा उपचार और हो चुके या होने वाले खर्चों के बारे में भी जानकारी देने को कहा. उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसे पीड़ितों के लिए पुनर्वास योजनाओं की जानकारी देने को भी कहा.
बेंच ने उनसे उन मामलों का विवरण भी देने को कहा जहां पीड़ितों को तेजाब पीने के लिए मजबूर किया गया. मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र से कानून में बदलाव पर विचार करने को कहा ताकि तेजाब हमलों में शामिल दोषियों को असाधारण सजा मिल सके. बेंच शाहीन मलिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो खुद तेजाब हमले की शिकार हैं.
मलिक कानून के तहत दिव्यांग लोगों की परिभाषा को व्यापक करने की मांग कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिन पीड़ितों के अंदरूनी अंगों को जबरदस्ती तेजाब पिलाने से जानलेवा नुकसान हुआ है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा और चिकित्सा देखभाल समेत अन्य राहत मिलें.
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