सिक्किम में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. National Centre for Seismology (NCS) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता 4.1 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई. यह भूकंप कम तीव्रता का था, इसलिए किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के हल्के भूकंप पहाड़ी क्षेत्रों में आम होते हैं और आमतौर पर ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते. फिर भी प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
सिक्किम में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है. इसके पीछे मुख्य कारण वहां की जमीन और उसकी बनावट है. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं. सबसे बड़ा कारण है पृथ्वी की प्लेट्स का टकराव. हमारी धरती कई बड़ी-बड़ी प्लेट्स में बंटी हुई है. सिक्किम उस जगह पर स्थित है जहां इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती रहती हैं. यही टकराव बहुत समय पहले हिमालय पर्वत के बनने की वजह बना था. लेकिन यह प्रक्रिया आज भी जारी है, इसलिए इस इलाके में जमीन के अंदर लगातार हलचल होती रहती है और भूकंप आते हैं. दूसरा कारण है हिमालय क्षेत्र का संवेदनशील होना. सिक्किम हिमालयी क्षेत्र में आता है. यह इलाका अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है, यानी यहां की जमीन अभी सेटल नहीं है. इसलिए यहां छोटी-बड़ी हलचल ज्यादा होती रहती है.
सिक्किम में भूकंप आने की वजह
तीसरा कारण है फॉल्ट लाइन यानी जमीन के अंदर दरारें. सिक्किम और उसके आसपास कई ऐसी दरारें मौजूद हैं. जब इन दरारों में दबाव बढ़ता है और अचानक निकलता है, तब भूकंप महसूस होता है. इसके अलावा भारी बारिश और भूस्खलन भी जमीन को कमजोर कर देते हैं. इससे छोटे-छोटे झटके आने की संभावना बढ़ जाती है. अगर खतरे की बात करें तो सिक्किम भारत के भूकंप के लिहाज से सबसे संवेदनशील इलाकों में आता है. यह Seismic Zone IV और Zone V में शामिल है, जिसमें Zone V सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है, इसलिए सिक्किम में भूकंप आना आम बात है, लेकिन सावधानी और तैयारी से इसके असर को कम किया जा सकता है.


