सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को एक मामले पर सुनवाई करते हुए रूस से रिश्तों की बात की और कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी आदेश से रूस के साथ रिश्ते खराब हों. यह सुनवाई भारतीय पति और रूसी पत्नी के बीच चल रहे विवाद को लेकर हो रही थी. महिला अपने अलग रह रहे भारतीय पति के साथ भरण पोषण को लेकर कटु विवाद के बीच बच्चे के साथ मॉस्को चली गई थी. कोर्ट ने केंद्र को चार हफ्ते के अंदर महिला और बच्चे का पता लगाने का निर्देश दिया है.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की इस दलील पर गौर किया कि महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं. ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि उन्हें ढूंढकर भारत वापस लाने के लिए इंटरपोल के नोटिस भी जारी किए गए हैं.
विधि अधिकारी ने कहा, ‘मुझे कुछ नई जानकारी मिली है…कृपया हमें कुछ और सप्ताह का समय दें. हम एक अपडेटेड रिपोर्ट दाखिल करेंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत का ‘सदाबहार मित्र’ है, जिस पर बेंच ने भी सहमति जताई और केंद्र को चार हफ्ते का समय दिया. इससे पहले विदेश मंत्रालय ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की थी.
कोर्ट ने विधि अधिकारी से ‘इस मुद्दे को मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के समक्ष निरंतर उठाने को कहा ताकि रूस की जांच समिति से बच्चे और याचिकाकर्ता-मां का पता लगाने का आग्रह किया जा सके.’ यह महिला साल 2019 से भारत में रह रही थी. महिला एक्स-1 वीजा पर यहां आई थी, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी. हालांकि, अदालती कार्यवाही के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर वीजा की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया.
बेंच ने ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘हम ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते जिससे भारत और रूस के रिश्ते खराब हों, लेकिन यह ऐसा मामला है जिसमें एक बच्चा शामिल है. हम सिर्फ यही आशा कर सकते हैं कि बच्चा अपनी मां के साथ स्वस्थ और सुरक्षित हो. आशा है कि यह मानव तस्करी का मामला नहीं है….’
पिछले साल 21 जुलाई को, कोर्ट को बताया गया था कि रूसी महिला बच्चे के साथ नेपाल सीमा के रास्ते देश छोड़कर चली गई. आशंका जताई गई कि वह शारजाह के रास्ते अपने देश पहुंच गई थी. पति ने आरोप लगाया कि उसकी अलग रह रही पत्नी बच्चे के संरक्षण के संबंध में अदालत के आदेश का पालन नहीं कर रही है. व्यक्ति ने दावा किया कि उसे महिला और बच्चे के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई, 2025 को निर्देश दिया कि बच्चे को सप्ताह में तीन दिन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को मां के पास रखा जाए और शेष दिनों के लिए बच्चा अपने पिता के पास रहेगा.
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