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अमेरिका का टैरिफ फुस्स! भारत ने 5 महीने में रूसी तेल खरीद का बनाया रिकॉर्ड, रिपोर्ट देख जलभुन ज
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अमेरिका का टैरिफ फुस्स! भारत ने 5 महीने में रूसी तेल खरीद का बनाया रिकॉर्ड, रिपोर्ट देख जलभुन ज

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 फीसदी टैरिफ का असर भारत-रूस के बीच तेल खरीद पर नहीं पड़ा. पिछले कुछ महीनों में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर रूसी कच्चा तेल खरीदा. भारत का रूस से कच्चा तेल आयात नवंबर में 4 फीसदी बढ़कर पांच महीनों में सबसे अधिक 2.6 अरब यूरो तक पहुंच गया. इस तेल से रिफाइंड फ्यूल की बड़ी मात्रा ऑस्ट्रेलिया को निर्यात की गई.

चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा भारत: रिपोर्ट

यूरोपीय रिसर्च सेंटर सीआरईए ने एक रिपोर्ट में कहा कि रूसी कच्चे तेल के मामले में भारत नवंबर में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा. इसके पहले अक्टूबर में भारत ने रूस से 2.5 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा था. नवंबर में रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का 47 फीसदी चीन, 38 फीसदी भारत, छह फीसदी तुर्किये और छह फीसदी यूरोपीय संघ के हिस्से गया.

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने कहा कि भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात अक्टूबर की तुलना में 4 फीसदी बढ़ गया जबकि कुल आयात मात्रा लगभग स्थिर रही. यह पिछले पांच महीने में सर्वाधिक खरीद रही. संस्था का अनुमान है कि दिसंबर में भी यह खरीद बढ़ सकती है, क्योंकि रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले कुछ ऑयल टैंकर रवाना हुए थे.

अमेरिकी प्रतिबंध का नहीं पड़ा असर

अमेरिका ने 22 अक्टूबर को रूस की बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और ल्यूकऑयल पर प्रतिबंध लगा दिए थे. यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की धन आपूर्ति सीमित करने के इरादे से यह पाबंदी लगाई गई थी. इन प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने रूसी तेल का आयात अस्थायी रूप से रोक दिया है. हालांकि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब भी गैर-प्रतिबंधित रूसी आपूर्तिकर्ताओं से खरीद जारी रखे हुए हैं.

सरकारी कंपनियों ने खूब खरीदा रूसी तेल: रिपोर्ट

सीआरईए ने कहा, नवंबर में जहां निजी तेल कंपनियों के आयात में हल्की गिरावट आई, वहीं सरकारी तेल कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल की खरीद 22 फीसदी बढ़ा दी. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा ग्राहक बन गया. कभी एक फीसदी से भी कम रहा रूसी तेल आयात का हिस्सा बढ़कर भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40 फीसदी हो गया.

‘घरेलू उपयोग के साथ भारत ने रिफाइन कर निर्यात भी किया’

आंशिक गिरावट आने के बावजूद नवंबर महीने में रूस ने भारत की कुल कच्चे तेल आपूर्ति में 35 फीसदी का योगदान दिया. इस कच्चे तेल को रिफाइन कर बनाए गए पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन को घरेलू उपयोग के साथ निर्यात भी किया जाता है. सीआरईए ने कहा कि नवंबर में भारत और तुर्किये की छह रिफाइनरियों ने 80.7 करोड़ यूरो मूल्य के रिफाइंड ईंधन निर्यात किए. इनमें से 46.5 करोड़ यूरो यूरोपीय संघ, 11 करोड़ यूरो अमेरिका, 5.1 करोड़ यूरो ब्रिटेन, 15 करोड़ यूरो ऑस्ट्रेलिया और 31 करोड़ यूरो कनाडा को भेजे गए.

यूरोपीय यूनियन लगा रखा है प्रतिबंध

इनमें से लगभग 30.1 करोड़ यूरो मूल्य के रिफाइंड तेल उत्पाद रूसी कच्चे तेल से बने थे. सीआरईए ने कहा, ऑस्ट्रेलिया को निर्यात नवंबर में 69 फीसदी बढ़ा, जो पूरी तरह गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी से भेजा गया. कनाडा ने भी आठ महीने बाद पहली बार रूसी तेल से बने ईंधन की खेप प्राप्त की.यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंध लगा रखा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका ने अभी तक ऐसा प्रतिबंध नहीं लगाया है.



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