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दिल्ली की कोर्ट में ऐसा कौन सा केस पहुंचा, जिसको देख अदालत ने लौटा दी CBI की चार्जशीट
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दिल्ली की कोर्ट में ऐसा कौन सा केस पहुंचा, जिसको देख अदालत ने लौटा दी CBI की चार्जशीट

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने अन्ट्रिक्स-देवास भ्रष्टाचार मामले में सुनवाई करते हुए सीबीआई की तरफ से 2016 में दाखिल की गई चार्जशीट वापस कर दी है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार दिल्ली की अदालत के पास नहीं है, क्योंकि कथित अपराध से जुड़ी ज्यादातर घटनाएं दिल्ली की सीमा के भीतर नहीं हुईं. अदालत ने आदेश में साफ कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों को देखने के बाद यह स्पष्ट होता है कि मामले से जुड़े अधिकांश घटनाक्रम दिल्ली के बाहर हुए हैं. ऐसे में दिल्ली की अदालत के पास इस केस की सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार यानी टेरिटोरियल जूरिस्डिक्शन नहीं बनता. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले से जुड़ी बड़ी घटनाएं और फैसले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए थे. इसलिए इस केस की सुनवाई वहीं की सक्षम अदालत में होनी चाहिए.

राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह अदालत इस मामले की सुनवाई करने के लिए सक्षम नहीं है. क्योंकि जिन घटनाओं के आधार पर अपराध दर्ज किया गया है, उनका बड़ा हिस्सा दिल्ली की सीमा में नहीं हुआ है. इसलिए इस केस की चार्जशीट जांच अधिकारी को वापस की जाती है. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के जांच अधिकारी को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वह इस चार्जशीट को संबंधित सक्षम अदालत में पेश करें. जहां इस मामले की सुनवाई का अधिकार बनता है.

राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज वापस करने के लिए कहा 

कोर्ट ने इसके साथ ही निर्देश दिया कि केस से जुड़े सभी दस्तावेज, डेटा और रिकॉर्ड चाहे वे जांच में इस्तेमाल किए गए हों या नहीं सभी को चार्जशीट के साथ जांच अधिकारी को वापस कर दिया जाए. अब उम्मीद है कि सीबीआई जल्द ही इस चार्जशीट को बेंगलुरु की संबंधित कोर्ट में दाखिल करेगी. जहां इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सकती है.

क्या है पूरा मामला?

अन्ट्रिक्स-देवास सौदा मामला देश के चर्चित विवादों में से एक रहा है. जिसमें इसरो की कमर्शियल ब्रांच अन्ट्रिक्स और देवास मल्टीमीडिया के बीच हुए समझौते को लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे. इस मामले की जांच लंबे समय से चल रही है और इसमें कई बड़े अधिकारी और कारोबारी भी जांच के दायरे में रहे हैं. साल 2011 में केंद्र सरकार ने यह डील रद्द कर दी थी. जिसमें स्पेक्ट्रम आवंटन में धोखाधड़ी और सरकारी नुकसान लगभग 578 करोड़ रुपये का आरोप लगा था. सीबीआई ने 2015 में एफआईआर दर्ज की और 2016 में पूर्व इसरो अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.



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