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भारत और रूस के करीब आने पर अमेरिका-यूरोप पर क्या असर, पुतिन के भारत दौरे पर क्या बोले एक्सपर्ट?
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भारत और रूस के करीब आने पर अमेरिका-यूरोप पर क्या असर, पुतिन के भारत दौरे पर क्या बोले एक्सपर्ट?

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन अपना 27 घंटे का भारत दौरा पूरा कर वापस लौट गए हैं. उन्होंने शुक्रवार को PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की और बिजनेस फोरम को संबोधित किया. इस दौरान भारत-रूस के बीच किसी बड़े समझौते के ऐलान नहीं हुआ. इससे पहले रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच SU-57 फाइटर जेट और S-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर डील हो सकती है. हालांकि, दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई की गारंटी समेत 19 समझौतों पर सहमति बनी. इनमें कई अहम समझौते भी शामिल हैं.

IIMC प्रोफेसर शिवाजी सरकार कहते हैं कि भारत की एक नई कोशिश है कि जिस तरह के माहौल में सारी दुनिया एक तरफ (अमेरिकी की तरफ) जा रही है, भारत इससे निकलने की कोशिश कर रहा है. पुतिन को भी इसकी जरूरत है क्योंकि पुतिन के लिए भी यूरोप परेशानी बन रहा है. पहले रूस को यूरोप का पक्का दोस्ता माना जाता था. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. अमेरिका, यूक्रेन और यूरोप से रिश्ता तोड़ने के बाद पुतिन अलग-थलग पड़ गए हैं. इस वजह से उन्हें भारत जैसे ताकतवर दोस्त की जरूरत है.

भारत को सबसे बड़ा साझेदार मानता रूस
भारत और रूस की दोस्ती बहुत पुरानी है और दोनों देश एक-दूसरे के लिए कई मायनों में जरूरी हैं. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और लगभग डेढ़ अरब की आबादी वाला मार्केट है. यही वजह है कि रूस भारत को अपने लिए महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. खासकर तेल के कारोबार में रूस को भारत से बड़ी उम्मीदें हैं.

ऑयल के अलावा डिफेंस सेक्टर में भी भारत-रूस साझेदारी काफी मजबूत है. कई सालों से भारत रूसी हथियार खरीदता आया है. इस यात्रा से पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारत रूस से नए लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर रहा है.

रूस के लिए भारत स्किल वर्कर्स की कमी पूरा करने वाला सोर्स
रूस में स्किल वर्कर्स की कमी है और वह भारत को इस कमी को पूरा करने वाले एक बड़े सोर्स के तौर पर देखता है. इस यात्रा का एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है. रूस दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि पश्चिमी देशों के विरोध और यूक्रेन युद्ध के बावजूद वह अकेला नहीं है.

ग्लोबल साउथ रीजन में रूस की साझेदारी
भारत पर दुनिया की नजर इसलिए भी रही क्योंकि उसे रूस के साथ एनर्जी और रक्षा संबंध मजबूत रखने हैं, जबकि यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय देश चाहते हैं कि भारत, रूस पर दबाव बनाए ताकि युद्ध कमजोर पड़े. पुतिन के लिए यह यात्रा ये दिखाने का मौका थी कि रूस दुनिया से अलग-थलग नहीं है और उसके पास ग्लोबल साउथ जैसे बड़े रीजन में मजबूत साझेदार मौजूद हैं.

पुतिन के भारत दौरे पर अहम समझौते

  • मैनपावर मोबिलिटी: भारत और रूस ने मैनपावर मोबिलिटी समझौता किया है. इससे दोनों देशों के नागरिक अस्थायी रूप से एक-दूसरे के देश में काम कर सकेंगे.
  • हेल्थकेयर और मेडिकल एजुकेशन: भारत के और रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और मेडिकल शिक्षा में सहयोग का समझौता हुआ. यह समझौता तीन बड़े सेक्टर्स पर फोकस है.
  • फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड: यह समझौता भारत की FSSAI और रूस की उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसी के बीच हुआ है. भारत और रूस इस बात पर साथ काम करेंगे कि दोनों देशों के लोगों को सुरक्षित और अच्छे मानक वाला खाना मिल सके.
  • जहाज निर्माण: भारत और रूस ने शिपिंग, पोर्ट्स, जहाज निर्माण और आर्कटिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नया समझौता किया है.
  • फर्टिलाइजर समझौता: भारत और रूस की बड़ी उर्वरक कंपनियों के बीच एक अहम समझौता हुआ है. इसमें रूस की उरलकेम (UralChem) और भारत की राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF), नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) और इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) शामिल हैं.
  • परमाणु उर्जा समझौता: भारत और रूस ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा और रणनीतिक समझौता किया है. इसका मकसद भविष्य की जरूरतों के मुताबिक परमाणु ऊर्जा तकनीक में साथ मिलकर काम करना है.



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