विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को संसद में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार क्षेत्र के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है, जहां लाखों भारतीय रहते हैं. राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि मौजूदा संघर्ष के कारण क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है.
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं. संवाद और कूटनीति ही इसका एकमात्र समाधान है. तनाव कम करने के लिए इन्हीं रास्तों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत चाहता है कि पश्चिम एशिया स्थिर बना रहे. खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार चिंतित है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन आज यानी सोमवार को लोकसभा ओम बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने से संबंधित प्रस्ताव पेश करने के लिए विपक्षी सदस्यों द्वारा दिए गए नोटिस पर विचार करेगी. संसद के वर्तमान बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है. इसके पहले दिन की कार्यवाही में ही इस विषय को सूचीबद्ध किया गया है. पीठासीन सभापति द्वारा बुलाए जाने पर सदन के 50 सदस्यों को नोटिस के समर्थन में खड़ा होना होगा और फिर प्रस्ताव सदन के विचार के लिए स्वीकृत माना जाएगा. इसके बाद प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होगा.
अगर 50 सदस्य नोटिस के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को इस मुद्दे पर विचार के समय सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है. सदन में संख्या बल सरकार के पक्ष में काफी अधिक है, जिससे यह लगभग तय माना जा रहा है कि प्रस्ताव पराजित हो जाएगा.
बिरला को अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के तीन सदस्य मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि सदन की अनुमति मांगेगे. कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन मिलने के बाद वे यह प्रस्ताव सदन में चर्चा और मतदान के लिए रखेंगे. संविधान के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर विचार किए जाने के दौरान सदन में उपस्थित रह सकते हैं. वह प्रस्ताव पर अपना पक्ष रख सकते हैं और मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन जब इस विषय पर चर्चा होगी तब वे कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते. बिरला संभवतः सत्तापक्ष की प्रमुख पंक्तियों में बैठ सकते हैं, हालांकि नियम इस बारे में स्पष्ट नहीं हैं.
बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कई विपक्षी नेताओं द्वारा लाया गया है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उन्होंने सदन में ‘स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण’ तरीके से काम किया. उन्होंने अध्यक्ष पर लोकसभा में कुछ ‘अप्रत्याशित कार्रवाई’ की बात करते हुए कांग्रेस सदस्यों के खिलाफ कुछ झूठे दावे कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में न आने का अनुरोध करने का भी आरोप लगाया था. बिरला ने नोटिस प्रस्तुत किए जाने की तारीख से सदन की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया था. लोकसभा सचिवालय ने कहा था कि वह एजेंडा के निपटारे के बाद ही लौटेंगे.


