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152 करोड़ का बैंक फ्रॉड केस, CBI पंचकुला कोर्ट ने सुनाई दो कंपनियों समेत 6 लोगों को सजा
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152 करोड़ का बैंक फ्रॉड केस, CBI पंचकुला कोर्ट ने सुनाई दो कंपनियों समेत 6 लोगों को सजा

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CBI की पंचकूला कोर्ट ने बैंक फ्रॉड के एक बड़े मामले में दो निजी कंपनियों और छह लोगों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है. ये मामला 152 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड से जुड़ा हुआ था, जिसमें आरोपियों पर बैंक से लोन लेकर उसका गलत इस्तेमाल करने का आरोप था. CBI कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने के लिए आपस में मिलकर साजिश रची और भारी भरकम लोन लेकर उसे असली कामों के बजाय डाइवर्ट कर दूसरे उपयोगों में खर्च किया.

कोर्ट ने दोनों कंपनियों पर लगाया जुर्माना
इस मामले में जिन कंपनियों को दोषी ठहराया गया है, उनमें मेसर्स एसआरएस रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और मेसर्स एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड शामिल है. कोर्ट ने दोनों कंपनियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, वहीं निजी आरोपियों में राजेश सिंगला और अनिल जिंदल को पांच साल की सख्त कैद और 1.2 लाख रुपये का जुर्माना, बिशन बंसल और नानक चंद तायल को पांच साल की सख्त कैद और 80 हजार रुपये का जुर्माना, जबकि सीमा नारंग और धीरेन्द्र गुप्ता को चार साल की सख्त कैद और 40 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया है.

क्या है पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत 14 जुलाई 2020 को हुई थी. जब कैनरा बैंक, करनाल सर्कल ऑफिस ने CBI में शिकायत दर्ज कराई. बैंक ने आरोप लगाया था कि आरोपी कंपनियों और संबंधित लोगों ने आपस में मिलकर बैंक को धोखा दिया और क्रेडिट लिमिट/लोन लेकर उसे अन्य उपयोगों में खर्च कर दिया. बैंक के मुताबिक आरोपियों ने कुल 152 करोड़ रुपये की लोन राशि ली और फिर उसे डमी कंपनियों के जरिए गबन कर दिया, जबकि लोन वास्तविक व्यावसायिक काम के लिए मंजूर किया गया था.

लोन में हुआ बड़ा हेरफेर
CBI की जांच में ये बात सामने आई कि मेसर्स एसआरएस रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 42 करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसमें से 41.95 करोड़ रुपये डाइवर्ट कर नुकसान पहुंचाया गया. वहीं मेसर्स एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड ने 110 करोड़ रुपये का लोन लिया और उसमें से 93.20 करोड़ रुपये का गलत इस्तेमाल हुआ. जांच में पाया गया कि लोन की रकम को ऐसी डमी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया जिनकी कोई वास्तविक बिजनेस एक्टिविटी नहीं थी.

CBI ने जांच के बाद 31 दिसंबर 2022 को आरोपियों और दोनों कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की. लंबी ट्रायल प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने 22 दिसंबर 2025 को सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और फिर 13 जनवरी 2026 को सजा सुनाई.



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