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भारत-EU के बीच होने वाला एग्रीमेंट क्यों होगा सबसे खास? ट्रंप की बढ़ सकती है टेंशन, समझें सबकुछ
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भारत-EU के बीच होने वाला एग्रीमेंट क्यों होगा सबसे खास? ट्रंप की बढ़ सकती है टेंशन, समझें सबकुछ

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच जिस मुक्त व्यापार समझौते को ब्रसेल्स ने मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स करार दिया है, उसके करीब पहुंचते ही यूरोप में व्यापक हलचल दिख रही है. इसी बीच नॉर्वे ने भारत के साथ गहरे आर्थिक जुड़ाव का खुला समर्थन जताया है, भले ही वह औपचारिक रूप से भारत-EU FTA का हिस्सा नहीं है.

निजी टीवी चैनल के वरिष्ठ पत्रकार को दिए गए विशेष इंटरव्यू में भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि प्रस्तावित भारत-EU समझौता ऐतिहासिक होगा और इससे भारत-नॉर्वे तथा भारत-यूरोप व्यापार संबंधों को भी नई गति मिलेगी.

EU से बाहर, फिर भी भारत के करीब 

राजदूत स्टेनर ने स्पष्ट किया कि नॉर्वे यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन वह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि भारत और नॉर्वे के बीच ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) पहले ही लागू हो चुका है, जो 1 अक्टूबर से प्रभाव में आया. उन्होंने कहा, ‘यह भारत के साथ हमारे संबंधों में एक बड़ा मील का पत्थर है. भारत और EU के बीच कोई भी बड़ा समझौता यूरोप के साथ भारत के रिश्तों के लिए भी ऐतिहासिक होगा.’ नॉर्वे के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि EU उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. ऐसे में भारत-यूरोप आर्थिक एकीकरण ओस्लो के लिए भी सकारात्मक संकेत है.

टैरिफ वॉर के दौर में फ्री ट्रेड का समर्थन

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ युद्ध के बीच नॉर्वे ने खुलकर मुक्त व्यापार के पक्ष में रुख अपनाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों का जिक्र करते हुए, जिनका असर भारत और यूरोपीय देशों पर भी पड़ा है, स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे जैसी छोटी और खुली अर्थव्यवस्था को मुक्त व्यापार से अत्यधिक लाभ हुआ है. उन्होंने कहा, ‘हम नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था में विश्वास करते हैं और व्यापार बाधाओं को हटाने के पक्षधर हैं, न कि उन्हें बढ़ाने के.’

नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप के दावे पर नॉर्वे का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से बार-बार नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर किए गए दावों पर भी नॉर्वे की राजदूत ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि नॉर्वे सरकार का नोबेल पुरस्कार चयन प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं होता. नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी एक स्वतंत्र संस्था है. यह निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति के होते हैं.

ग्रीनलैंड विवाद और नाटो में नॉर्वे की भूमिका

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी नेतृत्व की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे डेनमार्क की संप्रभुता का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है और नॉर्वे, नाटो का संस्थापक सदस्य होने के नाते, आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा पर गठबंधन के ढांचे के भीतर काम करता रहेगा.

भारत में होने वाले AI समिट में नॉर्वे की भागीदारी

तकनीकी कूटनीति पर बोलते हुए नॉर्वे की राजदूत ने पुष्टि की कि नॉर्वे अगले महीने भारत में होने वाले AI समिट में भाग लेगा. उन्होंने भारत की AI को लोकतांत्रिक बनाने की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि नॉर्वे के डिजिटलाइजेशन मंत्री एक बड़े प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जिसमें प्रमुख कारोबारी नेता भी शामिल होंगे. यह भारत-नॉर्वे के बीच टेक्नोलॉजी सहयोग को नई ऊंचाई देने का संकेत माना जा रहा है.

गाजा और यूक्रेन पर शांति पहल

गाजा को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस पहल पर स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे को आमंत्रण मिला है, लेकिन उसने संयुक्त राष्ट्र से जुड़ाव को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं. उन्होंने बताया कि नॉर्वे ने दावोस में साइनिंग सेरेमनी में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि यह समझना जरूरी है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की संरचनाओं से कैसे जुड़ती है.हालांकि, उन्होंने दोहराया कि नॉर्वे गाजा में शांति और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन करता है.

भारत-नॉर्वे संबंधों का भविष्य और पीएम मोदी का दौरा

राजदूत स्टेनर ने कहा कि भारत-नॉर्वे संबंध स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिनका आधार नया व्यापार समझौता और बढ़ती कारोबारी रुचि है.उन्होंने यह भी पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष नॉर्वे का दौरा कर सकते हैं, जहां वह इंडिया-नॉर्डिक समिट में भाग लेंगे. यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा.

ये भी पढ़ें: अमेरिका में एक और नागरिक की हत्या, इमीग्रेशन एजेंटों ने मारी गोली, मचा बवाल



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