DS NEWS | The News Times India | Breaking News
‘सिर्फ चिंताजनक नहीं, बल्कि कलंक…’, एआर रहमान के आरोपों पर बोले कैलाश सत्यार्थी
India

‘सिर्फ चिंताजनक नहीं, बल्कि कलंक…’, एआर रहमान के आरोपों पर बोले कैलाश सत्यार्थी

Advertisements


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित समाज सुधारक और लेखक कैलाश सत्यार्थी ने शनिवार (17 जनवरी, 2026) को देश के चर्चित संगीतकार ए. आर. रहमान के भेदभाव वाले आरोपों और धर्म की वजह से काम कम होने पर उनसे हमदर्दी जताई.

उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. भारत की संस्कृति और दर्शन ऐसा नहीं सिखाती है. अगर एआर रहमान ऐसा कह रहे हैं तो यह चिंता की ही बात नहीं, बल्कि कलंक है. ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों का संवाद बहुत जरूरी है. हालांकि, संवाद के दायरे सिमट रहे हैं. जिन्हें शिकायत है और जिससे शिकायत है, उन्हें इस बारे में आपस में बैठकर बात करना चाहिए.

मैं जरूर उनसे बात करूंगा- कैलाश सत्यार्थी

ABP न्यूज से की गई खास बातचीत में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि संवाद जरूर होना चाहिए, क्योंकि संवाद से ही समाधान निकलता है. अगर इस तरह की चीज हो रही है, तो यह हमारी संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है. हमें साथ-साथ चलना चाहिए, भेदभाव कतई नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘मैं जब भी उनसे मिलूंगा तो इस बारे में बात भी करूंगा. मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं और भारत के लोग भी उनका बहुत सम्मान करते हैं. अगर कुछ लोग ऐसा करते हैं तो उन्हें भी उसे पूरा भारत नहीं मानना चाहिए, क्योंकि भारतीय समाज उनका बड़ा सम्मान करता है. हर बिरादरी और हर मजहब के लोग उनके साथ खड़े हैं. सामाजिक समरसता को और आगे बढ़ाना चाहिए.’

धर्म कहीं जोड़ने का काम नहीं कर रहे, सिर्फ बातें हो रहीं- सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘मैं हमेशा न्याय के साथ खड़ा होता हूं. उनसे जब भी मिलूंगा तो इस बारे में चर्चा जरूर करूंगा. एक अकेला दुख व्यक्त करता रहे तो कान में उंगली डालना ठीक नहीं है, सभी को मिलकर इस पर सोचना चाहिए. वैसे इस तरह की समस्याएं दुनिया के हर देश में चल रही हैं. बिना कटुता और अलगाव के काम होना चाहिए. कटुता और अलगाव सभी के लिए चिंता की बात है. पूरी दुनिया में धर्म का काम जोड़ना था, लेकिन धर्म कहीं भी जोड़ने का काम नहीं कर रहे हैं, सिर्फ बातें कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता इतनी ज्यादा हो गई है कि वह यानी धर्म तोड़ने का काम कर रहे हैं. अलगाव और घृणा को अब रोकना होगा. धर्म के नाम पर दुनिया जितनी टूटी और बिखरी हुई है, वह ठीक नहीं है. विचारधारा से जनित राजनीति और सरकारों की आक्रामकता हर क्षेत्र में नजर आ रही है. इसका समाधान करुणा में है, दया वाली करुणा में नहीं बल्कि अनुभूति कराने वाली करुणा में है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को अगर कामयाबी मिलती है तो उसके पीछे भारत के नाम का असर जरूर होता है.

विश्व गुरु नहीं, विश्वमित्र बनने की कोशिश करनी चाहिए- सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘दुनिया में कोई भी देश विश्व गुरु नहीं बन सकता है. यह टर्मलाजी हमारी ही उपज है. विश्वमित्र बनने की कोशिश करनी चाहिए. भारत के डीएनए में यह ताकत है कि हम विश्वमित्र बन सकते हैं. हम हमेशा से समरसता के साथ रहते हैं, मिलजुल कर रहते हैं. एक-दूसरे की समस्याओं का समाधान करके विश्वमित्र बन सकते हैं. एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं. जो भी लोग विश्व गुरु बनने का दावा करते हैं, वह करते रहें. मैं व्यावहारिक बात कर रहा हूं कि विश्व गुरु की बात प्रैक्टिकल नहीं है, विश्वामित्र बनने की कोशिश की जा सकती हैं.’

हथियार के बल पर विश्व गुरु बनना है, तो अमेरिका बुरा नहीं- सत्यार्थी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नोबेल पुरस्कार के लिए ताकत का प्रदर्शन करने पर कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘दौलत ताकत और हथियारों के जखीरे के आधार पर ही विश्व गुरु बनना है, तो अमेरिका बुरा नहीं है. फिर तो डोनाल्ड ट्रंप ही विश्व गुरु होंगे.’

उन्होंने कहा, ‘ट्रंप की सोच बहुत बड़ा अजूबा है. सोच भी नहीं सकता कि कोई नोबेल प्राइज के लिए यह सब करेगा. वेनेजुएला की जिस बहन को नोबेल मिला है और उन्होंने अपना नोबेल ट्रंप को दिया, वह भी अजब घटना है. हमारे पास इसके लिए शब्द नहीं है. यह व्यावहारिक भी नहीं है. सम्मान छीनकर और मांग कर भी आज के दौर में हासिल किया जा रहा है, लोग आज के दौर में ऐसा कर रहे हैं. हमारे देश और दुनिया में जो धर्म गुरुओं की बाढ़ आ गई है, वह भी ऐसा ही चाहते हैं. नैतिकता के आधार पर मिलने वाला सम्मान छीनकर हासिल नहीं जा सकता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं ट्रंप के प्रयासों से भी हैरान हूं और वेनेजुएला की महिला से भी हैरान हूं. ट्रंप को सपने की व्यावहारिकता को भी समझना होगा. फिर भी मैं ट्रंप को शुभकामनाएं दे रहा हूं. सद्भावना और शुभकामना तो दे रहा हूं, लेकिन हैरानी के साथ.’

बांग्लादेश की हालात पर बोले कैलाश सत्यार्थी

बांग्लादेश की हालात पर नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की भूमिका बहुत कम बची है. उसकी भूमिका सिर्फ चैरिटेबल कामों तक ही बच कर रह गई है. अच्छी-अच्छी बातें करने में ही लगी है. यह बहुत दुर्भाग्यजनक बात है. जिस उद्देश्य के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ बना था, वह काम खत्म होता जा रहा है और उसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है. हालांकि इसका कोई विकल्प भी नहीं बचा है.’

उन्होंने कहा, ‘भारत को बांग्लादेश के मामले में दखल देना चाहिए. सबको एक-दूसरे के मामले में दखल देना चाहिए, पूरी दुनिया एक है. वहां पर जो हो रहा है, उसके लिए वहां की जनता से ज्यादा जिम्मेदार बाहरी ताकतें हैं. दुनिया के तमाम मजबूत राष्ट्र वहां के मामले में दखल दे रहे हैं. इस हालात से बांग्लादेश का बहुत नुकसान होने वाला है.

उन्होंने आगे कहा, ‘राजनीति और धर्म के लोग अपना काम जिम्मेदारी से नहीं कर रहे हैं. मैं उन्हें उपदेश नहीं दे सकता, लेकिन कह सकता हूं कि जिस चिंगारी से संस्थाएं बनी थीं, वह चिंगारी विलुप्त होती जा रही है. नैतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही होनी जरूरी है यह सिकुड़ती जा रही है.’

यह भी पढ़ेंः Maharashtra Municipal Election: ‘न BJP, न इंडिया अलायंस, हम…’, 125 सीटों पर जीत के बाद ओवैसी का बड़ा ऐलान



Source link

Related posts

तमिलनाडु में 2 बसों की आमने-सामने टक्कर, कम से कम 11 यात्रियों की मौत; कई घायल

DS NEWS

अमेरिका की सेंट्रल कमांड के साथ मिलकर गोला-कारतूस दागेंगे भारत के जवान; टेंशन में आ जाएंगे आसिम

DS NEWS

जापान को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री, PM मोदी ने दी शुभकामना, कहा- ‘मिलकर काम करने को उत्सुक’

DS NEWS

Leave a Comment

DS NEWS
The News Times India

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More

Privacy & Cookies Policy