लोकसभा में विपक्षी पार्टियों ने आज स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया है. यह नोटिस कांग्रेस की अगुवाई में दिया गया है और इसमें करीब 118 से 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं. विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर पक्षपात कर रहे हैं और विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं दे रहे हैं. इस वजह से संसद में कई दिनों से हंगामा चल रहा है और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है.
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नोटिस जारी कैसे हुआ?
यह नोटिस संविधान के आर्टिकल 94 और लोकसभा के नियम 200 के तहत दिया गया है. इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और DMK जैसी पार्टियों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए, जबकि वे विपक्ष के नेता हैं.
नोटिस मिलने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा सचिवालय इस नोटिस की जांच करेगा और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा. उन्होंने इसे जल्द से जल्द प्रोसेस करने के निर्देश दिए हैं. लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह कदम लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि स्पीकर का रवैया विपक्ष को दबा रहा है.
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नोटिस के बाद क्या होता है?
1. नोटिस की जांच: सबसे पहले लोकसभा सचिवालय इस नोटिस को जांचेगा. अगर यह नियमों के अनुसार सही पाया गया, तो इसे स्वीकार किया जाएगा. इसमें कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जो यहां पूरा हो चुका है.
2. मोशन को सदन में लाना: अगर नोटिस स्वीकार हो गया, तो स्पीकर या डिप्टी स्पीकर इसे सदन में डिबेट के लिए लाएंगे. स्पीकर खुद इस डिबेट की अध्यक्षता नहीं कर सकते, इसलिए डिप्टी स्पीकर या कोई अन्य सदस्य चेयर पर बैठेंगे.
3. चर्चा और वोटिंग: सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी. इसके बाद वोटिंग होगी. प्रस्ताव पास होने के लिए सदन की कुल सदस्यता की साधारण बहुमत (कम से कम 272 वोट) चाहिए. वर्तमान में NDA गठबंधन के पास बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम है. लेकिन अगर पास हो गया, तो स्पीकर को अपना पद छोड़ना पड़ेगा.
4. समय सीमा: आमतौर पर ऐसे नोटिस पर 14 दिनों के अंदर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यह सदन की स्थिति पर निर्भर करता है. अगर सदन चल रहा है, तो जल्दी हो सकता है.
यह पहली बार नहीं है जब स्पीकर के खिलाफ ऐसा कदम उठाया गया है, लेकिन सफलता बहुत कम मिलती है क्योंकि सत्ता पक्ष के पास बहुमत होता है. विपक्ष का यह कदम मुख्य रूप से स्पीकर के रवैये पर ध्यान खींचने और दबाव बनाने के लिए है.
क्या है पूरा मामला?
लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से विपक्षी सांसदों और सत्ता पक्ष के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. विपक्ष का कहना है कि स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने की इजाजत नहीं दी. राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं मिला, जिससे सदन में काफी शोर-शराबा हुआ. विपक्ष ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि वे सत्ता पक्ष की तरफ झुकाव दिखा रहे हैं और विपक्षी सांसदों को सस्पेंड कर रहे हैं. इसी गुस्से में आज दोपहर 1:14 बजे कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद और के सुरेश ने लोकसभा सचिवालय के महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा है.


