लखनऊ के बड़ा इमामबाड़ा में ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड का महाअधिवेशन हुआ. इसमें नेपाल, बांग्लादेश और देशभर से 2 हजार लोग पहुंचे. इस दौरान मौलाना आगा सैय्यद अब्बास रिजवी ने विवादित बयान दिया. जम्मू कश्मीर के रहने वाले मौलाना ने लखनऊ में कहा कि हमारे जवानों को भारत माता की जय और वंदे मातरम के नाम पर डराया जाता है. साथ ही कहा कि वो लोग वंदे मातरम गाने को बोलते हैं, लेकिन उन्हें खुद इसका मतलब नहीं मालूम.
उन्होंने वंदे मातरम को लेकर कहा कि इसका मतलब ‘ऐ मां तुझे सलाम है’. मैं तो हमेशा सलाम करता हूं. अरे आप आजाद खिजा में रहने वाले लोग हैं. मैं तो वहां का रहने वाला हूं, जहां हम पाकिस्तान का जुल्म झेल रहे हैं. मैंने एक किताब लिखी है, आगोश ए हिंद. ऐसी किताब लिखकर बताएं. साथ ही उन्होंने शिया मुस्लिमों की नुमाइंदगी को लेकर भी अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने राजनाथ सिंह से इसको लेकर बात भी करने का दावा किया.
लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में हुआ अधिवेशन
अधिवेशन लखनऊ के बड़े इमामबाड़े में हुआ. इसमें देश विदेश के शिया धर्मगुरु शामिल हुए. इस दौरान शिया समुदाय के उत्थान की अधिवेशन में चर्चा हुई. अधिवेशन में 24 प्रस्ताव पास हुए. इस दौरान शिया मुसलमानों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किया गया. देश में कॉमन सिविल कोड लागू किये जाने पर विचार विमर्श इस अधिवेशन में किया गया.
बोर्ड ने की कब्रिस्तान के पुननिर्माण की मांग
इस दौरान बोर्ड ने भारत सरकार से जन्नत उल बकी कब्रिस्तान के पुननिर्माण की भारत सरकार के माध्यम से मांग की. इनके अलावा सच्चर कमिशन की तरह शिया मुसलमानों के हालात जानने के लिए एक अलग कमीशन बनाने की मांग भी की गई. साथ ही आर्थिक पिछड़ेपन की बुनियाद पर नौकरियों में शिया मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग की गई. साथ ही 8 करोड़ शिया मुसलमानों का पार्लियामेंट और देश की विधान सभाओं में प्रतिनिधित्व के न होने पर विचार किया गया.
सामाजिक सुधार से लेकर आतंकवाद के खिलाफ प्रस्ताव पारित
इनके अलावा बोर्ड की तरफ से सामाजिक सुधार, खासकर शादी ब्याह और गमी के मौके पर बेजा खर्चे को लेकर सुधार करने की मांग की गई. देश और पूरे विश्व में फैले आतंकवाद की निन्दा और उसको रोकने का प्रस्ताव भी बोर्ड की तरफ से पास किया गया. शिया समुदाय की धार्मिक और प्रचलित शिक्षा में सुधार और तरक्की का प्रस्ताव भी पास किया गया. नफरत फैलाने वाले भाषणों और मॉब लिंचिंग रोकने के लिए कानूनी उपायों पर विचार विमर्श किया गया. वक्फ बोर्डों में फैले भ्रष्टाचार और वक्फ संपत्तियों की बिक्री और वक्फ संशोधन अधिनियम पर चर्चा की गई. इनके अलावा हिजाब पर किसी भी तरह की रोक लगाने की मांग पर विचार किया गया. साथ ही समाज की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अधिकारों की स्थिति पर भी विचार किया गया.


