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पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ बालाघाट का प्रसन्नजीत, फोन कॉल पर बहन से बोला- मेरे पास टिकट नहीं
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पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ बालाघाट का प्रसन्नजीत, फोन कॉल पर बहन से बोला- मेरे पास टिकट नहीं

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एमपी के बालाघाट से जुड़ी एक अच्छी खबर सीमापार से आई है. यह एक बहन के संघर्ष की कहानी है. 7 साल के बाद उसका भाई प्रसन्नजीत पाकिस्तान के जेल से रिहा हुआ है. भाई की एक आवाज फोन पर सुनकर वह रो पड़ी. पाकिस्तान में 7 भारतीयों को रिहा किया गया है, इसमें 6 लोग पंजाब के हैं, वहीं एक बालाघाट का है. बालाघाट के प्रसन्नजीत रंगारी, 7 साल से पाकिस्तान की जेल में बंद थे. 2021 में जब उनके परिवार को पता चला कि वह पाकिस्तान की जेल में बंद हैं तो उनकी बहन संघमित्रा उनके वतन वापसी को लेकर कई जतन कर रही थी. उनकी रिहाई के लिए बहन संघमित्रा ने कई ऑफिस के चक्कर लगाए. नेताओं से मिलीं. उन्होंने प्रसन्नजीत के नाम एक चिट्ठी भी पिछले साल लिखी थी. 

1 फरवरी को बहन को मिली भाई की रिहाई की खबर

रिहाई की खबर फोन के जरिए 1 फरवरी को मिली. संघमित्रा और उनके परिवार को खैरलांजी पुलिस स्टेशन पर सबसे पहले यह जानकारी आई. इसके बाद उन्हें अमृतसर थाने से फोन आए. इस दौरान उनके भाई प्रसन्नजीत से भी बातचीत करवाई गई, लेकिन बहन आवाज नहीं पहचान पाई. इसके बाद उन्होंने कहा कि भाई तू घर आ जा. उनके भाई ने कहा कि उनके पास टिकट नहीं है. तुम मुझे लेने आ जाओ. अब उनके जीजाजी उन्हें अमृतसर से लेने जाएंगे. 

2017-18 में अचानक घर से लापता हो गया था प्रसन्नजीत

बात 2017 और 18 की है, जब प्रसन्नजीत रंगारी अचानक घर से लापता हो गए थे. इसके बाद बिहार चले गए. वहां से लौटे, फिर अचानक गायब हो गए. लंबे समय से उनकी तलाश की गई, लेकिन जब नहीं मिला तो मरा हुआ मान लिया. उम्मीद तब जागी, जब 2021 में एक कॉल के जरिए पता चला कि वह पाकिस्तान के बाटापुर में गिरफ्तार किए गए हैं. वहां उन्हें सुनील अदे नाम से बंद किया गया था. प्रसन्नजीत परिवार के होनहार छात्र रहे हैं. उन्होंने जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी. फार्मेसी की पढ़ाई की है. उन्होंने साल 2011 में एमपी स्टेट फॉर्मेसी काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवाया हुआ है. 

जिला प्रशासन करेगा परिवार के लोगों की मदद

इस पर जिला कलेक्टर ने मदद करने का आश्वासन परिवार को दिया है. प्रसन्नजीत के परिवार के लोग आर्थिक रूप से बेहद ही कमजोर हैं. इस वजह से उन्होंने कलेक्टर से मदद मांगी. फिलहाल प्रसन्नजीत समेत अन्य लोगों को बाघा बॉर्डर पर बीएसएफ के हवाले कर दिया है. उनकी नानकदेव अस्पताल में मेडिकल जांच की गई है. उनके हेल्थ ठीक होने के बाद अब उनके परिवार को सौंपा जा रहा है. वह फिलहाल अमृतसर के गुरु नानक देव हॉस्पिटल में हैं. उनकी जिम्मेदारी एएसआई जसविंदर सिंह के पास है. 



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