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LAB ने न्यायिक जांच का किया स्वागत, लद्दाख के एक प्रतिनिधि को आयोग में शामिल करने की रखी मांग
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LAB ने न्यायिक जांच का किया स्वागत, लद्दाख के एक प्रतिनिधि को आयोग में शामिल करने की रखी मांग

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लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने पिछले महीने केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह जिले में हुई हिंसक झड़पों की न्यायिक जांच कराने के केंद्र के फैसले का शनिवार (18 अक्टूबर, 2025) को स्वागत किया. इसके साथ ही LAB ने जांच के लिए गठित आयोग में लद्दाख से एक प्रतिनिधि को शामिल करने की मांग की.

समूह ने शनिवार (18 अक्टूबर) को दिन में मौन मार्च को विफल करने के लिए उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन की आलोचना की और कहा, ‘ऐसी कार्रवाइयां कभी भी फलदायी साबित नहीं हो सकतीं या हमें केंद्र के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए राजी नहीं कर सकतीं.’

केंद्र ने शुक्रवार (17 अक्टूबर, 2025) को लेह में 24 सितंबर, 2025 को हुई हिंसक झड़पों की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की घोषणा की थी और यह लद्दाख के प्रदर्शनकारी समूहों की एक प्रमुख मांग को पूरा करने की दिशा में कदम था. लेह में हुई हिंसक झड़प में 1999 के कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने वाले एक अनुभवी सैनिक सहित चार लोगों की जान चली गई थी.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी की अधिसूचना

केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. एस. चौहान की अध्यक्षता में जांच आयोग को कानून व्यवस्था के हालात बिगड़ने, पुलिस कार्रवाई और इसके परिणामस्वरूप चार लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की पड़ताल करनी है. वह जांच समिति में सेवानिवृत्त जिला और सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह परिहार न्यायिक सचिव के रूप में कार्य करेंगे, जबकि IAS अधिकारी तुषार आनंद जांच आयोग के प्रशासनिक सचिव होंगे.

एलएबी के सह-अध्यक्ष ने रखी मांग

LAB के सह-अध्यक्ष और लद्दाख बौद्ध संघ के प्रमुख चेरिंग दोरजे लकरुक ने लेह में संवाददाताओं से कहा, ‘हम न्यायिक जांच के लिए गृह मंत्रालय की अधिसूचना का स्वागत करते हैं. लेकिन हमें प्राथमिकी संख्या 144 का संदर्भ जैसी कुछ कमियां नजर आईं. ऐसा लग रहा है कि जांच हमारे जवानों के खिलाफ है और दूसरी बात तीनों में से कोई भी लद्दाख का नहीं है.’ लकरुक ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि यह जांच पूरी तरह पारदर्शी हो और इसमें कुछ भी छिपाने की कोशिश न की जाए. हम चाहते हैं कि लद्दाख से भी किसी को इस आयोग का हिस्सा बनाया जाए.’

उन्होंने कहा कि मौन मार्च को विफल करने के लिए लोगों पर लगाए गए प्रतिबंध हम सभी के लिए बहुत दुखद बात है और हम ऐसे उपायों को अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी मानते हैं.

लद्दाख के अधिकांश हिस्से में दिखा ब्लैकआउट

इस बीच, शाम छह बजे से लद्दाख में ब्लैकआउट देखा गया और अधिकतर निवासियों ने एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) की ओर से आज शनिवार (18 अक्टूबर, 2025) की शाम अपने विरोध कार्यक्रम के तहत दिए गए आह्वान के जवाब में अपने घरों की लाइटें बंद कर दीं.

यह भी पढ़ेःं ‘बंगाल में घुसपैठियों का रेड कार्पेट बिछाकर हो रहा स्वागत’, ममता बनर्जी पर अमित शाह का तंज



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