कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा को पॉक्सो एक्ट मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने गुरुवार (13 नवंबर, 2025) को ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें जांच एजेंसी की ओर से भेजे गए समन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा की चुनौती को खारिज कर दिया गया था.
निचली अदालत ने याचिका की खारिज तो हाई कोर्ट पहुंचे थे येदियुरप्पा
दरअसल, बी. एस. येदियुरप्पा ने ट्रायल कोर्ट में जांच एजेंसी के समन को चुनौती दी थी, लेकिन निचली अदालत ने उनकी उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था. इसके बाद येदियुरप्पा ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, मगर हाई कोर्ट से भी येदियुरप्पा को राहत नहीं मिल सकी. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा के मामले में क्या दिया आदेश
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट किया है कि ट्रायल कोर्ट आरोपी A1 (बी. एस. येदियुरप्पा) की उपस्थिति को तभी अनिवार्य करे, जब वह आवश्यक हो. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट जरूरत पड़ने पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए दायर आवेदन पर भी विचार कर सकता है.
हाई कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित न हो निचली अदालत- कर्नाटक उच्च विद्यालय
कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश जारी किया कि ट्रायल कोर्ट मुकदमे के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के मामले का निपटारा करे और उच्च न्यायालय की टिप्पणियों से किसी भी तरह से प्रभावित न हो. इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता (बी. एस. येदियुरप्पा) ट्रायल कोर्ट में आवश्यक आवेदन दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिनमें डिस्चार्ज के लिए आवेदन भी शामिल है.


