दिल्ली बम बलास्ट की जांच अब तेज हो गई है. नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) हर एंगल से जांच कर रही है. इसी केस को लेकर बुधवार (12 नवंबर) को जम्मू कश्मीर की पूर्व आईपीएस अधिकारी शाहिदा परवीन गांगुली घटनास्थल पर पहुंचीं. उनका घटनास्थल पर पहुंचना अपने आप में काफी अहम माना जा रहा है.
शाहिदा परवीन गांगुली जम्मू कश्मीर की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और SOG की सदस्य हैं. शाहिदा लेडी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से भी जानी जाती हैं. साल 2000 के शुरुआती वर्षों में आतंक के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन्स को उन्होंने लीड किया. शाहिदा परवीन का जन्म कश्मीर के एक मुस्लिम परिवार में हआ. शादी के बाद पति के बंगाली परिवेश से होने के चलते उन्होंने खुद भी गांगुली सरनेम लगा लिया.
कौन हैं शाहिदा परवीन गांगुली
1997 बैच की आईपीएस अधिकारी शाहिदा परवीन 1997 से लेकर 2002 तक एसओजी की एलीट टीम का हिस्सा रहीं. वो यूनिट जो सीधे आतंकियों से भिड़ती है. इस दौरान उन्होंने कई बड़े मिशन का नेतृत्व किया. 1999 में हुए एक बड़े ऑपरेशन में उन्होंने घात लगाकर किए गए हमले को नाकाम किया. इस दौरान कई आतंकवादियों को ढेर किया गया. इस बहादुरी के लिए उन्हें गैलंट्री अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया.
शाहिदा परवीन ने एसओजी के बाद सीआईडी में असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के पद पर काम किया और कई हाई प्रोफाइल आतंकी केसों की जांच की. उन्होंने साल 2000 में पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के कई बड़े आतंकी मॉडयूल ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई. शाहिदा ने महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम को लेकर कई जागरूकता अभियान चलाए.
विवादों से भी रहा नाता
बता दें कि दो बच्चों की मां शाहिदा परवीन वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं. उनके जीवन में कई विवाद भी हुए, क्योंकि उनके कई एनकाउंटर को लेकर मानवाधिकार समूहों ने सवाल उठाए. हालांकि अधिकतर मामलों में शाहिदा परवीन को कोर्ट से क्लीन चिट मिली.
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