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‘…तो जमानत देनी ही होगी’, उमर खालिद की बेल के मामले पर क्यों बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़
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‘…तो जमानत देनी ही होगी’, उमर खालिद की बेल के मामले पर क्यों बोले पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़

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पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की जमानत नामंजूर मामले को लेकर देश के पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार (18 जनवरी) को कहा कि दोष सिद्धि से पहले जमानत प्राप्त करना एक नागरिक का अधिकार है. इसके साथ ही पूर्व सीजेआई ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित कॉलेजियम व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायपालिका में आम नागरिक के भरोसे की बहाली और मजबूती के लिए कहा. 

‘दोष सिद्धि से पूर्व जमानत अधिकार का मामला’
19वें जयपुर साहित्य महोत्सव में ‘आइडियाज ऑफ जस्टिस’ सत्र में वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी की ओर से शुरूआत में ही उमर खालिद की जमानत का मुद्दा उठाए जाने पर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) चंद्रचूड़ ने कहा, ”दोष सिद्धि से पूर्व जमानत अधिकार का मामला है. हमारा कानून एक प्रकल्पना पर आधारित है और वह प्रकल्पना यह है कि कोई भी आरोपी व्यक्ति, अपराध सिद्ध होने तक निर्दोष है.” कई मामलों का उदाहरण देते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर आरोपी के समाज में लौटकर फिर से अपराध को अंजाम देने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा कानून के शिकंजे से भाग निकलने के लिए किए जाने की आशंका है तो आरोपी को जमानत देने से इंकार किया जा सकता है.

राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर क्या कहा
उन्होंने कहा कि अगर ये तीनों आधार नहीं हैं तो जमानत देनी ही होगी. मुझे लगता है कि जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, वहां अदालत का कर्तव्य है कि वह मामले की गहराई से पड़ताल करे. अन्यथा हो यह रहा है कि लोग वर्षों तक जेलों में बंद रहते हैं. भारतीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता जाहिर करने के साथ ही उन्होंने कहा कि देश का संविधान सर्वोच्च कानून है और मामले में कोई ठोस अपवाद नहीं है और त्वरित सुनवाई में देरी है तो आरोपी जमानत का अधिकारी है.

जिला अदालतों द्वारा जमानत न देने पर क्या कहा 
सत्र और जिला अदालतों द्वारा जमानत नहीं दिए जाने को न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने चिंता का विषय बताया और कहा कि प्राधिकार के प्रति अविश्वास बढ़ा है और न्यायाधीशों को यह डर सताता है कि कहीं उनकी निष्ठा पर सवाल तो नहीं उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि जमानतों के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं.उन्होंने सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन प्रदान करने, समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर करने और ‘चुनावी बांड’ संबंधी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों को अपने कार्यकाल के परिवर्तनकारी बड़े फैसले बताया.  

वैवाहिक बलात्कार मामले पर क्या कहा
सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद नहीं लेने संबंधी सवाल पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि इस समय वह बतौर नागरिक जिंदगी का आनंद उठा रहे हैं. उनसे उनके कार्यकाल के दौरान किसी मामले को लेकर अफसोस संबंधी सवाल पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़़ ने कहा कि देश को आजाद हुए 76 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में नहीं लाया जा सका है. उन्होंने इसके लिए कानून में बदलाव की पुरजोर वकालत की. उनके कार्यकाल में ही सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण न केवल हिंदी भाषा में बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी भारतीय भाषाओं में शुरू किया गया.

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